LPG अपडेट: पैनिक बुकिंग में आई कमी, कालाबाजारी पर पेट्रोलियम मंत्रालय का एक्शन

नई दिल्ली। पिछले तीन सप्ताह में तीन लाख पचास हजार पीएनजी कनेक्शन सक्रिय किए गए या फिर नए दिए गए हैं। सोमवार को पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने डेली मीडिया ब्रीफिंग में संतोष जताया कि एलपीजी की पैनिक बुकिंग कम हुई है और सरकार कालाबाजारी करने वालों की सख्त निगरानी कर रही है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि कच्चे तेल की आपूर्ति पर्याप्त बनी हुई है और रिफाइनरियां सामान्य रूप से संचालित हो रही हैं, जिससे खुदरा उपलब्धता स्थिर बनी हुई है। पीएनजी और सीएनजी की आपूर्ति प्राथमिकता वाले उपभोक्ताओं के लिए जारी है, जबकि औद्योगिक मांग का लगभग 80 प्रतिशत पूरा किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पीएनजी को बढ़ावा देने के लिए अतिरिक्त एलपीजी आवंटन और नीतिगत सहयोग के माध्यम से तीन सप्ताह में लगभग 3 लाख 50 हजार नए घरेलू और वाणिज्यिक पीएनजी कनेक्शन सक्रिय किए गए हैं।
एलपीजी आपूर्ति पर निगरानी रखी जा रही है, लेकिन वितरण जारी है। शर्मा ने बताया कि कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर आवंटन को लेकर भी खास प्रबंध किया गया है। उन्होंने कहा, "आवंटन सरकार ने वाणिज्यिक एलपीजी आवंटन को और बढ़ाया है। हम लगातार राज्य सरकारों से अनुरोध कर रहे हैं कि कुल मात्रा का 50 फीसदी प्राथमिकता वाले क्षेत्रों—जैसे रेस्टोरेंट, होटल, औद्योगिक कैंटीन, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों, सामुदायिक रसोई और प्रवासी श्रमिकों के लिए 5 किलोग्राम सिलेंडर—के लिए उपलब्ध कराया जाए।"
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कालाबाजारी पर नकेल कसने के उपायों का जिक्र करते हुए कहा, " अब तक 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने लगभग 15,800 टन उठाया है, जबकि 15 राज्यों को केरोसिन आवंटित किया गया है। कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए 32 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने निगरानी तंत्र स्थापित किए हैं, जिनके तहत 37,000 से अधिक छापे, 550 एफआईआर और 150 गिरफ्तारियां हुई हैं, जबकि तेल कंपनियों ने 234 कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। नागरिकों से अपील है कि घबराहट में बुकिंग न करें और एलपीजी का संयमित उपयोग करें।"
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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