हरियाण: जींद की कोर्ट ने रिश्वतखोर जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी और लिपिक को सुनाई चार-चार साल की कैद, 35-35 हजार रुपये का जुर्माना भी ठोका
स्कूल की मान्यता के नाम पर मांगे थे 5 लाख रुपये, विजिलेंस ने लिपिक को रंगे हाथों किया था गिरफ्तार

जींद। भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति को कायम रखते हुए अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश जयबीर सिंह की अदालत ने सोमवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया। अदालत ने रिश्वत लेने के मामले में तत्कालीन जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी सदानंद वत्स और उनके कार्यालय के लिपिक घनश्याम को दोषी करार देते हुए चार-चार साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। वहीं दोनों दोषियों पर 35-35 हजार रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया गया है।
क्या था पूरा मामला?
मामले के अनुसार, रोहतक के भालौठ निवासी अमरजीत सिंह विजय नगर (जींद) में पिछले 20 वर्षों से 'स्मार्ट किड्स' नाम से एक मान्यता प्राप्त स्कूल चला रहे थे। मई 2022 में जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी सदानंद वत्स (डीईईओ) सदानंद वत्स और लिपिक घनश्याम ने स्कूल का दौरा किया और नियमों का उल्लंघन बताते हुए नोटिस जारी किया। अमरजीत ने स्पष्ट किया कि उनका स्कूल पूरी तरह मान्यता प्राप्त है, लेकिन अधिकारियों की मंशा कुछ और ही थी।
5 लाख रुपये की मांग और गिरफ्तारी
आरोप है कि 26 अगस्त 2022 को अधिकारियों ने अमरजीत से कहा कि यदि वह 5 लाख रुपये देता है, तो स्कूल को नियमों के अनुसार दिखा दिया जाएगा। रिश्वत देने से मना करने पर 30 अगस्त को लिपिक घनश्याम स्कूल बंद करने का आदेश लेकर पहुँच गया। इस मानसिक दबाव के बीच सौदा 5 लाख में तय हुआ, जिसमें से 2 लाख रुपये पहली किस्त के तौर पर मांगे गए। अमरजीत ने इसकी सूचना पहले ही विजिलेंस टीम को दी। योजना के अनुसार, 1 सितंबर 2022 को जब शिकायतकर्ता के भानजे ने लिपिक घनश्याम को रिश्वत की राशि दी, तो विजिलेंस ने उसे रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। जांच में डीईईओ सदानंद वत्स की संलिप्तता भी स्पष्ट रूप से सामने आई।
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अदालत में चले लंबे ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष ने पुख्ता सबूत और गवाह पेश किए। माननीय न्यायाधीश जयबीर सिंह ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद माना कि शिक्षा विभाग के इन जिम्मेदार पदों पर बैठे व्यक्तियों ने अपने पद का दुरुपयोग कर भ्रष्टाचार किया है। इस फैसले को जिले में भ्रष्टाचार के विरुद्ध एक बड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
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लेखक के बारे में
ओ.पी. पाल पिछले साढ़े तीन दशकों से पत्रकारिता में सक्रिय एक प्रतिष्ठित नाम हैं। भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त (P.I.B. Accredited) वरिष्ठ पत्रकार श्री पाल ने लंबे समय तक लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही के साथ-साथ गृह, रक्षा और कृषि जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की नेशनल ब्यूरो स्तर पर रिपोर्टिंग की है।
अमर उजाला और दैनिक जागरण से पत्रकारिता की शुरुआत करने वाले श्री पाल ने 'शाह टाइम्स' में न्यूज़ एडिटर और 'हरिभूमि' (दिल्ली) में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में लंबी सेवाएं दी हैं। राजनीति विज्ञान और कृषि के विशेषज्ञ होने के साथ-साथ वे 'साहित्य रत्न' से भी विभूषित हैं। वर्तमान में वे एक स्वतंत्र पत्रकार और स्तंभकार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

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