दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा कदम: प्राइवेट स्कूलों की वित्तीय जांच की मांग वाली याचिका पर नोटिस जारी
नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली के मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों के खातों का आडिट करने की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया है। चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय की अध्यक्षता वाली बेंच ने मामले की अगली सुनवाई 22 अप्रैल को करने का आदेश दिया।
याचिका एनजीओ जस्टिस फॉर ऑल ने दायर की है। याचिका में कहा गया है कि दिल्ली सरकार ने दिल्ली स्कूल एडुकेशन एक्ट के प्रावधानों के तहत निजी मान्यता प्राप्त स्कूलों का लगातार आडिट करने के प्रावधान का पालन करने में विफल रही है। याचिका में कहा गया है कि दिल्ली प्रशासन पूरे तरीके से वित्तीय पारदर्शिता और जिम्मेदारी पूरा करने में विफल रही है। इसकी वजह से निजी स्कूलों ने शिक्षा को व्यवसाय बना दिया है और वे छात्रों के अभिभावकों से मनमानी मोटी फीस वसूल रहे हैं।
याचिका में कहा गया है कि निजी स्कूलों द्वारा मनमानी मोटी फीस वसूलने से रोकने का एकमात्र उपाय खातों का आडिट करना है। स्कूलों के खातों का आडिट कर ये पता लगाया जा सकता है कि पैसे स्कूल की बेहतरी के लिए खर्च किए जा रहे हैं या किसी के निजी लाभ के लिए। याचिका में कहा गया है कि दिल्ली सरकार ने 1624 निजी स्कूलों का निरीक्षण किया लेकिन एक भी स्कूल के खाते का आडिट नहीं किया। वैसे में इस निरीक्षण का कोई मतलब नहीं रहा। याचिका में कहा गया है कि पिछले दो वर्षों में कई निजी स्कूलों ने अपनी फीस दोगुनी कर ली है। इससे अभिभावकों पर जबरदस्त आर्थिक दबाव बढ़ा है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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