शमसाबाद स्टेशन पर ट्रेन रोकने पहुंचे भाकियू कार्यकर्ता, समझाने पर स्टेशन मास्टर को ज्ञापन सौंप कर लौटे
फर्रुखाबाद। उत्तर प्रदेश के जनपद फर्रुखाबाद में क्षेत्रीय जनता की लंबे समय से चली आ रही ट्रेन ठहराव की माँग को लेकर मंगलवार को शमसाबाद रेलवे स्टेशन पर भारी गहमागहमी रही। भारतीय किसान यूनियन स्वराज के नेतृत्व में ट्रेन रोककर आंदोलन करने की तैयारी थी, लेकिन रेल अधिकारियों और पुलिस प्रशासन के घंटों समझाने-बुझाने के बाद कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन स्टेशन मास्टर को सौंपकर आंदोलन स्थगित किया।
आंदोलन की चेतावनी के मद्देनजर प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। जीआरपी निरीक्षक रिपुदमन सिंह, आरपीएफ निरीक्षक फर्रुखाबाद ओम प्रकाश मीणा और नवाबगंज थाना प्रभारी राजीव कुमार भारी पुलिस बल के साथ स्टेशन पर डटे रहे। पूरा स्टेशन परिसर छावनी में तब्दील नजर आया। भाकियू जिलाध्यक्ष प्रमोद मिश्रा के नेतृत्व में पहुँचे कार्यकर्ताओं को अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि उनकी जायज माँगों को उच्चाधिकारियों तक प्रभावी ढंग से पहुँचाया जाएगा।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि शमसाबाद स्टेशन एक बड़ी आबादी का केंद्र है, फिर भी यहाँ ट्रेन सं. 15041 सुबह 7:15 बजे फर्रुखाबाद-कासगंज एक्सप्रेस ट्रेन सं. 15040: सुबह 10:30 बजे कानपुर की ओर जाने वाली एक्सप्रेस का ठहराव नहीं है जबकि इस रूट की अन्य सभी जरूरत की ट्रेनें यहाँ रुकती हैं। इन दो प्रमुख ट्रेनों के न रुकने से लखनऊ, कानपुर, कन्नौज और कासगंज जाने वाले छात्र, व्यापारी और मरीज परेशान हैं। ज्ञापन में स्पष्ट किया गया कि इन ट्रेनों के ठहराव से न केवल यात्रियों को सुरक्षित व किफायती सफर मिलेगा, बल्कि रेलवे के राजस्व में भी भारी बढ़ोतरी होगी। आपातकालीन चिकित्सा स्थिति में यह ठहराव क्षेत्र के लिए जीवनदायिनी साबित होगा।
ज्ञापन सौंपने के दौरान जिलाध्यक्ष प्रमोद मिश्रा के साथ नवाबगंज नगर अध्यक्ष पप्पू राठौर, मोहम्मदाबाद ब्लॉक अध्यक्ष मानेंद्र, उपाध्यक्ष राजीव राठौर, कुलदीप सक्सेना, ब्लॉक नवाबगंज अध्यक्ष अर्जित सिंह, सुरजीत कुमार सहित भारी संख्या में कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।स्टेशन मास्टर आर कुमार ने बताया कि किसान नेताओ ने जिलाधिकारी को सम्बोधित ज्ञापन उन्हें दिया है।जिसे मूल रूप में जिलाधिकारी को भेज दिया जाएगा।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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