"किताबों की जगह झाड़ू!” – सरकारी स्कूल में बच्चों से सफाई, व्यवस्था पर उठे सवाल

हापुड़। जिले के गढ़मुक्तेश्वर क्षेत्र के नैनापुर गढ़ावली गांव से शिक्षा व्यवस्था की खामियों को उजागर करती तस्वीरें सामने आई हैं। सरकारी स्कूल में बच्चे किताब-कॉपी थामने के बजाय झाड़ू लेकर सफाई करते नजर आए, जिससे शिक्षा प्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि स्कूल परिसर की सफाई का काम उन मासूम बच्चों पर थोप दिया गया है, जिन्हें पढ़ाई का अधिकार प्राप्त है। बच्चों से पढ़ाई के बजाय काम कराए जाने की यह तस्वीर शिक्षा के मंदिर की वास्तविक स्थिति को उजागर करती है।
ये भी पढ़ें यूपी में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: 7 IPS और 7 IAS अधिकारियों के तबादले, अंकिता शर्मा बदायूं की नई SSPशिक्षा विभाग के दावे और सरकारी योजनाओं के बावजूद जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। स्कूलों में संसाधनों की कमी और जिम्मेदारी की अनदेखी का सीधा असर बच्चों पर पड़ रहा है।
विशेषज्ञों और स्थानीय अभिभावकों का कहना है कि जब बच्चे ही सफाई का बोझ उठाएंगे, तो उनका पढ़ाई और भविष्य प्रभावित होगा। ऐसे मामलों में सवाल उठता है कि क्या जिम्मेदार अधिकारी इस ओर ध्यान देंगे, या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
इस घटना ने शिक्षा व्यवस्था की खामियों और सुधार की आवश्यकता को स्पष्ट कर दिया है। बच्चे शिक्षा के अधिकार के हकदार हैं, न कि स्कूल की सफाई का बोझ उठाने वाले।
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