उत्तर प्रदेश में गन्ना विकास पर उच्चस्तरीय बैठक: नई किस्मों, टिश्यू कल्चर और परिशुद्ध खेती पर जोर
मेरठ। चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास लक्ष्मी नारायण चौधरी की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में नवीन गन्ना किस्मों को बढ़ाने तथा पुरानी किस्मों के प्रतिस्थापन, उन्नत किस्मों के सम्वर्धन, नवीन तकनीकों का उपयोग तथा गन्ना एवं चीनी उत्पादकता में सतत् वृद्धि सुनिश्चित करने से संबंधित विभिन्न योजनाओं एवं कार्य योजनाओं पर गहन विचार-विमर्श किया गया।
चीनी मिलों के सुरक्षित क्षेत्र में गन्ना किस्मों के प्रतिस्थापन, सम्वर्धन, उच्च गन्ना उत्पादकता, अधिक चीनी परता एवं रोग प्रतिरोधी किस्मों के प्रसार, प्रमाणिक बीज हेतु उन्नतशील पौधाशालाओं का अधिष्ठापन एवं टिश्यू कल्चर को बढ़ावा, रोग एवं कीट नियंत्रण हेतु समेकित प्रबंधन प्रणाली, मृदा स्वास्थ्य सुधार एवं संतुलित उर्वरकों का अनुप्रयोग, यंत्रीकरण, पेड़ी प्रबन्धन, नवाचार अनुप्रयोग एवं कृत्रिम बुद्धिमता (Artificial Intelligence), कम्प्यूटर एवं आकड़ों के विश्लेषित उपयोग से परिशुद्ध खेती (Precision Farming) का गन्ना कृषकों तथा गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग से संबंधित समस्त हितबद्ध पक्षों के व्यापक एवं यथेष्ट हित में समावेसी कार्यक्रम क्रियान्वयन सुनिश्चित किये जाने के लिए विभागीय अधिकारियों, अनुसंधान विशेषज्ञों, चीनी मिल प्रतिनिधियों एवं गन्ना किसान प्रतिनिधियों के अलावा 30 सदस्यीय कोर ग्रुप का गठन किया गया है।
कोर ग्रुप की बैठक में गन्ना क्षेत्र के समग्र विकास के लिए उन्नतशील किस्मों के समान गुण वाले प्लान्टलेट्स से त्वरित आच्छान बढ़ाने के लिए टिश्यू कल्चर को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ओएमयू पर हस्ताक्षण किए गए।
महत्वपूर्ण समझौतों से टिश्यू कल्चर तकनीक के माध्यम से रोगमुक्त, शुद्ध एवं उन्नतशील / होनहार गन्ना किस्मों का अधिक बीज उत्पादन कर किसानों तक उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। यह पहल प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए नवीन किस्मों के त्वरित बीज की उपलब्धता सुनिश्चित कराने की दिशा में अत्यंत लाभकारी सिद्ध होने के साथ गन्ना उत्पादन बढ़ाकर चीनी उद्योग को भी स्थिर एवं गुणवत्तापूर्ण कच्चा माल उपलब्ध कराने में सहायक होगी। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने, महिला स्वयं सहायता समूहों की सहभागिता बढ़ाने तथा स्थानीय स्तर पर उद्यमिता को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से इस समझौते के माध्यम से महिला स्वयं सहायता समूहों को गन्ना क्षेत्र से संबंधित बीज गन्ना उत्पादन, नर्सरी विकास के साथ-साथ प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धित उत्पादों, प्रेरणा कैन्टीन, ड्रोन संचालन एवं अन्य सहायक गतिविधियों से जोड़ा जाएगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसर सृजित होंगे एवं महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता को बल मिलेगा।
वर्तमान परिदृश्य में गन्ने की खेती में प्रयुक्त होने वाले श्रमसाध्य गतिविधियों, श्रमिकों की ससमय अनुपलब्धता एवं बढ़ती हुई खेती लागत के कारण गन्ने की खेती में यंत्रीकरण का वृहद अनुप्रयोग की अपरिहार्यता के क्रम में गन्ने की कटाई एवं छिलाई हेतु गन्ना हार्वेस्टर के विभिन्न निर्माताओं द्वारा प्रस्तुतिकरण किया गया।
बैठक में विभागीय अधिकारियों एवं संबंधित संस्थाओं को निर्देशित किया कि कृषि जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप उच्च उत्पादकता वाली, रोग प्रतिरोधक एवं गुणवत्तायुक्त गन्ना प्रजातियों को प्रोत्साहित किया जाए तथा पुरानी किस्मों को प्रतिस्थापित किया जाय। गन्ना किसानों को समय से बीज की समुचित उपलब्धता करायी जाय। जिससे गन्ना उत्पादन की लागत में कमी लाते हुए प्रति इकाई क्षेत्रफल उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि सुनिश्चित की जा सके। इसी प्रकार गन्ना कृषकों, चीनी मिलों एवं महिला स्वयं सहायता समूहों से संबंधित सम्पन्न समझौता ज्ञापनों के सुखद एवं दूरगामी परिणाम के दृष्टिगत अन्य हितवद्ध पक्षों को भी गन्ना खेती को कृषकों के लिए अधिक लाभकारी बनाने हेतु अतिरिक्त समझौता ज्ञापन करने के लिए प्रेरित किया जाय। वर्तमान में गतिशील पेराई सत्र 2025-26 में चीनी मिलों की गन्ना पेराई संबंधी परिलक्षित आंकड़ों एवं गत पेराई सत्र में चीनी मिलों की पेराई अवधि तथा चीनी मिल द्वारा की गयी गन्ना पेराई के दृष्टिगत त्वरित आच्छादन, गन्ना किस्म विस्थापन, गन्ना उत्पादकता, पेड़ी प्रबन्धन, समन्वित रोग एवं कीट प्रबंधन, समन्वित पोषक तत्व प्रबंधन एवं अप्रयुक्त गन्ना किस्मों के प्रसार पर प्रभावी नियंत्रण करते हुए वांछित पूर्ति हेतु चीनी मिलों को विभाग के समन्वय में मुख्य भूमिका निभाते हुए अपरिहार्य स्थलीय कार्ययोजना (माईक्रोप्लान) तैयार कर उस पर प्रभावी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन के साथ ही सामयिक एवं सतत् अनुश्रवण सुनिश्चित करने के निर्देश दिये गये।
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