"वाराणसी: बच्चों ने पूछा क्या मठ पर बुलडोजर चलेगा? शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने सरकार पर साधा निशाना
वाराणसी। ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का एक ताजा बयान सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। वाराणसी में बच्चों के साथ संवाद के दौरान उठे एक सवाल ने इस बहस को जन्म दिया कि क्या धार्मिक मठों पर भी प्रशासनिक कार्रवाई का साया मंडरा रहा है।
बच्चों का सवाल और "बुलडोजर" का खौफ
वाराणसी में एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान कुछ बच्चों ने शंकराचार्य से बड़ी मासूमियत लेकिन गंभीर चिंता के साथ पूछा— "महाराज जी, क्या अब शंकराचार्य के मठ पर भी बुलडोजर चलेगा?"
यह सवाल उत्तर प्रदेश में हाल के वर्षों में हुई विभिन्न बुलडोजर कार्रवाइयों और अतिक्रमण विरोधी अभियानों के संदर्भ में देखा जा रहा है। बच्चों के मन में बैठी इस दहशत ने शंकराचार्य को सरकार और प्रशासन पर हमलावर होने का मौका दे दिया।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का जवाब: "हिंदुओं को डराने की कोशिश"
बच्चों के सवाल का जवाब देते हुए शंकराचार्य ने कड़े शब्दों में सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आज के समय में छोटे बच्चों के मन में भी 'बुलडोजर' का नाम सुनकर डर पैदा हो गया है। यह केवल निर्माण गिराना नहीं, बल्कि हिंदुओं और जनता को मानसिक रूप से डराने का प्रयास है। शंकराचार्य ने कहा कि सत्ता जब निरंकुश हो जाती है, तो वह यह भूल जाती है कि मठ और मंदिर आस्था के केंद्र हैं। अगर बच्चों के मन में ऐसा सवाल आ रहा है, तो इसका मतलब है कि समाज में असुरक्षा की भावना गहरी हो चुकी है।उन्होंने स्पष्ट किया कि मठों और संतों पर ऐसी किसी भी कार्रवाई का डटकर मुकाबला किया जाएगा। उन्होंने सरकार को चेतावनी भरे लहजे में कहा कि आस्था के केंद्रों पर उंगली उठाना विनाशकारी हो सकता है।
विवाद की पृष्ठभूमि: केदारनाथ और राम मंदिर विवाद
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पिछले काफी समय से सरकार की कुछ नीतियों के आलोचक रहे हैं। उनके इस ताजा बयान को उनके पुराने स्टैंड से जोड़कर देखा जा रहा है। उन्होंने केदारनाथ मंदिर से 'सोना गायब होने' के आरोपों पर जांच की मांग की थी। प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के समय भी उन्होंने 'अधूरे मंदिर' में प्रतिष्ठा को शास्त्र सम्मत न बताते हुए अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। शंकराचार्य के इस बयान के बाद अभी तक प्रशासन या सत्ता पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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