मेरठ। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा हाल ही में अधिसूचित/प्रस्तावित नए नियमों को लेकर देशभर में उठ रही चिंताओं के बीच सोमवार को मेरठ में इसका व्यापक विरोध देखने को मिला। 1857 क्रांति मंच के बैनर तले अधिवक्ताओं, छात्रों और जागरूक नागरिकों ने कमिश्नरी पार्क से कलेक्ट्रेट तक शांतिपूर्ण मार्च निकालकर नए UGC विनियमों में संशोधन की मांग की।
प्रदर्शन के उपरांत मंच के प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी मेरठ के माध्यम से प्रधानमंत्री भारत सरकार को संबोधित एक विस्तृत ज्ञापन एसडीएम को सौंपा। ज्ञापन में UGC के नए नियमों को शैक्षणिक संस्थानों, छात्रों और संघीय ढांचे के लिए गंभीर रूप से चिंताजनक बताते हुए कई महत्वपूर्ण आपत्तियाँ दर्ज कराई गई हैं।
झूठी शिकायतों पर दंड हटाने पर सवाल
ज्ञापन में कहा गया है कि UGC के Grievance Redressal Regulations, 2018 में झूठी एवं दुर्भावनापूर्ण शिकायतों को प्रारंभिक स्तर पर निरस्त करने का स्पष्ट प्रावधान था, जिसे नए नियमों में हटा दिया गया है। मंच का कहना है कि इससे शिकायत निवारण प्रणाली के दुरुपयोग, ब्लैकमेलिंग और व्यक्तिगत रंजिश की आशंका बढ़ेगी।
इस विषय पर 1857 क्रांति मंच सदस्य अभिमन्यु त्यागी ने कहा,
“दुनिया के हर कानून का मूल सिद्धांत यह है कि झूठी और दुर्भावनापूर्ण शिकायत करने वाले को दंड मिले।
UGC ने इस प्रावधान को हटाकर शिक्षण संस्थानों में अराजकता और ब्लैकमेलिंग का रास्ता खोल दिया है।
हम मांग करते हैं कि झूठी शिकायतों पर दंड का प्रावधान तत्काल बहाल किया जाए।”
राज्य विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर चिंता
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि संविधान के अनुच्छेद 246 एवं सातवीं अनुसूची के अनुसार शिक्षा समवर्ती सूची का विषय है। मंच का कहना है कि UGC का दायित्व मानक निर्धारण एवं समन्वय तक सीमित होना चाहिए, न कि राज्य विश्वविद्यालयों के प्रशासन में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप।
इस पर अभिमन्यु त्यागी ने कहा,
“शिक्षा केंद्र और राज्यों का साझा विषय है।
यदि UGC के माध्यम से राज्य विश्वविद्यालयों की प्रशासनिक स्वायत्तता कमजोर की जाती है,
तो इसका सीधा नुकसान उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और स्थानीय आवश्यकताओं को होगा।
यह संघीय ढांचे की भावना के खिलाफ है।”
सामान्य (Open) और EWS वर्ग की अनदेखी का आरोप
ज्ञापन का एक प्रमुख बिंदु सामान्य (Open) एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) से जुड़ा है। मंच का कहना है कि संविधान के अनुच्छेद 15(6) और 16(6) के तहत EWS को मान्यता प्राप्त है, लेकिन नए नियमों में उनके अधिकारों की कोई स्पष्ट सुरक्षा नहीं की गई है।
इस मुद्दे पर सामाजिक कार्यकर्ता दीपक शर्मा चोटी एवं शिक्षाविद अरविंद शर्मा ने कहा,
“सामान्य वर्ग किसी एक जाति या समुदाय का नाम नहीं है।
इसमें हर धर्म और हर समाज के आर्थिक रूप से कमजोर छात्र आते हैं।
अगर यह नियम गलत है, तो इसका नुकसान केवल किसी एक वर्ग को नहीं,
बल्कि सभी धर्मों और समुदायों के सामान्य वर्ग के छात्रों को होगा।”
प्रधानमंत्री तक मांग पहुँचाने का आग्रह
प्रतिनिधिमंडल ने एसडीएम से अनुरोध किया कि ज्ञापन को प्रधानमंत्री कार्यालय, शिक्षा मंत्रालय और UGC तक शीघ्र पहुँचाया जाए। साथ ही, इसकी प्रतिलिपि केंद्रीय शिक्षा मंत्री, UGC अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को भी भेजी गई है।
मंच ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन गैर-राजनीतिक और लोकतांत्रिक है तथा यदि नए नियमों में इन खामियों को दूर नहीं किया गया, तो भविष्य में भी शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जारी रहेगा।
प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में अधिवक्ता, छात्र और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। इनमें मुख्य रूप से अभिमन्यु त्यागी, दीपक शर्मा, अरविंद शर्मा, विश्वास त्यागी, सागर रस्तोगी, शिवम शर्मा, प्रवेश त्यागी, राहुल राणा, अभिषेक सिंह, नितिन गर्ग, अंकुर गुप्ता, नितिन तोमर, सचिन त्यागी, धीरज त्यागी, शिवांक भारद्वाज, सचिन शर्मा, उत्सव शर्मा, अमित भारद्वाज, मयंक शर्मा, अशोक त्यागी, मुनीत शर्मा, शशांक भारद्वाज सहित सैकड़ों लोग मौजूद थे।
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