सुप्रीम कोर्ट से राहत के बावजूद 'यादव जी की लव स्टोरी' पर बवाल जारी, किसान यूनियन ने किया विरोध-प्रदर्शन
मुरादाबाद। सुप्रीम कोर्ट द्वारा फिल्म 'यादव जी की लव स्टोरी' के खिलाफ दाखिल याचिका को खारिज किए जाने के बाद भी विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। अदालत से फिल्म को बड़ी राहत मिलने के बावजूद उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में भारतीय किसान यूनियन (मुलायम) ने फिल्म के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संगठन के कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर फिल्म के विरोध में नारेबाजी की और इसे तुरंत बैन करने की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो वे दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ा आंदोलन करेंगे।
विरोध-प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने जिला प्रशासन को एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के जरिए संगठन ने कहा कि फिल्म के टाइटल और कहानी से एक विशेष समुदाय की भावनाएं आहत हो रही हैं। उनका आरोप है कि फिल्म में यादव समाज की छवि को गलत तरीके से पेश किया गया है, जिससे सामाजिक तनाव बढ़ सकता है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि अगर प्रशासन ने समय रहते फिल्म पर प्रतिबंध नहीं लगाया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने जंतर-मंतर पर बड़े प्रदर्शन की चेतावनी दी। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने फिल्म के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की। गौरतलब है कि 25 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म के टाइटल और रिलीज पर रोक लगाने की मांग को खारिज कर दिया था। अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि फिल्म के शीर्षक से किसी भी जाति या समुदाय का अपमान नहीं होता।
केवल आशंका के आधार पर किसी फिल्म के टाइटल को असंवैधानिक नहीं ठहराया जा सकता। न्यायालय ने यह मामला फिल्म 'घूसखोर पंडत' से अलग बताया था और कहा कि यहां किसी समुदाय को नकारात्मक रूप में पेश करने का कोई ठोस आधार नजर नहीं आता। 'यादव जी की लव स्टोरी' शुक्रवार को सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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