फरवरी में गेंदा की खेती से कम लागत में पाएं डबल मुनाफा, जानें पूसा की उन्नत किस्में और वैज्ञानिक तरीका
फरवरी का महीना बागवानी और नगदी फसलों के लिए बेहद अनुकूल माना जाता है. इस समय मौसम संतुलित रहता है जिससे पौधों की बढ़वार तेज होती है और रोगों का खतरा भी कम रहता है. अगर आप कम लागत में ज्यादा कमाई का सपना देख रहे हैं तो गेंदा की खेती आपके लिए शानदार विकल्प बन सकती है. गेंदा एक ऐसी फसल है जिसकी मांग सालभर बनी रहती है. शादी विवाह धार्मिक आयोजन और सजावट हर जगह इसकी जरूरत पड़ती है. ऐसे में सही समय और सही तरीके से इसकी खेती शुरू करने पर अच्छा उत्पादन और बेहतर आमदनी मिल सकती है.
पूसा की उन्नत किस्में देंगी शानदार पैदावार
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार फरवरी के मौसम में गेंदा की उन्नत किस्में बेहतर परिणाम देती हैं. इनमें पूसा नारंगी और पूसा बसंती किस्म खास तौर पर उपयुक्त मानी जाती हैं. इन किस्मों के फूल आकर्षक रंग समान आकार और लंबे समय तक ताजगी बनाए रखने के लिए जाने जाते हैं. बाजार में इनकी मांग अधिक रहती है जिससे अच्छी कीमत मिलने की संभावना बढ़ जाती है.
इसके अलावा कोलकाता गेंदा और टेनिस बॉल जैसी लोकप्रिय किस्में भी लगाई जा सकती हैं. सही किस्म का चयन करना बहुत जरूरी है क्योंकि यही आधी सफलता तय करता है. यदि स्थानीय मौसम और बाजार की जरूरत को ध्यान में रखकर किस्म चुनी जाए तो उत्पादन के साथ लाभ भी बढ़ता है.
ये भी पढ़ें आलू के बाद जायद मक्का की खेती से बढ़ाएं मुनाफा जानें सही बुवाई और उत्पादन का वैज्ञानिक तरीकानर्सरी तकनीक से होगा अधिक फायदा
गेंदा की खेती सीधे खेत में बीज डालकर करने के बजाय पहले नर्सरी में पौध तैयार करना ज्यादा लाभदायक होता है. बीज बोने के बाद लगभग बीस से पच्चीस दिन तक पौध को सुरक्षित स्थान पर तैयार किया जाता है. जब पौधे मजबूत हो जाएं तब उन्हें मुख्य खेत में रोपित किया जाता है. इस विधि से पौधों की जीवित रहने की क्षमता बढ़ती है और खेत में एक समान बढ़वार होती है.
ये भी पढ़ें Kheera Farming: फरवरी में करें अगेती खीरे की खेती 50 दिन में तुड़ाई और बाजार में मिलेगा ऊंचा दामरोपाई करते समय पौधों के बीच उचित दूरी रखना जरूरी है ताकि उन्हें पर्याप्त धूप हवा और पोषण मिल सके. समय समय पर सिंचाई और निराई गुड़ाई करने से पौधे स्वस्थ रहते हैं और फूलों की संख्या बढ़ती है. संतुलित उर्वरक का प्रयोग करने से उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में सुधार होता है.
कम लागत में अधिक मुनाफे का अवसर
गेंदा की खेती में लागत अपेक्षाकृत कम आती है जबकि बाजार में इसकी मांग स्थिर बनी रहती है. वैज्ञानिक पद्धति अपनाने से फूलों की गुणवत्ता बेहतर होती है और अच्छी कीमत मिलती है. फरवरी में अनुकूल जलवायु के कारण पौधों की वृद्धि तेज होती है जिससे कम समय में तैयार फसल मिल सकती है. यदि सही देखभाल की जाए तो यह खेती आय का मजबूत और टिकाऊ स्रोत बन सकती है.
फरवरी का महीना गेंदा की खेती शुरू करने के लिए सुनहरा अवसर है. पूसा नारंगी और पूसा बसंती जैसी उन्नत किस्में और नर्सरी तकनीक अपनाकर बेहतर पैदावार हासिल की जा सकती है. कम लागत और सालभर की मांग इसे लाभदायक फसल बनाती है. सही योजना और वैज्ञानिक तरीके से की गई खेती आपके लिए सफलता का नया रास्ता खोल सकती है.
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