Kheera Farming: फरवरी में करें अगेती खीरे की खेती 50 दिन में तुड़ाई और बाजार में मिलेगा ऊंचा दाम
गर्मी के मौसम में खीरा ऐसी सब्जी है जिसकी मांग अचानक बहुत बढ़ जाती है. सलाद हो या ठंडा रायता हर घर में इसकी जरूरत महसूस होती है. अगर यही खीरा समय से पहले बाजार में पहुंच जाए तो कमाई कई गुना बढ़ सकती है. विशेषज्ञों के अनुसार फरवरी के मध्य में अगेती खेती शुरू करने पर करीब पैंतालीस से पचास दिन में फल आना शुरू हो जाता है. सही तापमान सही मिट्टी और वैज्ञानिक तरीके अपनाकर कम लागत में अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है.
फरवरी का मौसम क्यों है सबसे अनुकूल
अगेती खीरे की खेती के लिए अठारह से तीस डिग्री सेल्सियस तापमान सबसे बेहतर माना जाता है. इस तापमान पर बीजों का अंकुरण तेज और मजबूत होता है. अधिक ठंड की स्थिति में सीधे खेत में बुवाई करने से अंकुरण प्रभावित हो सकता है इसलिए नर्सरी पद्धति अपनाना ज्यादा सुरक्षित और लाभकारी रहता है. जब बाजार में आपूर्ति कम और मांग अधिक होती है तब अगेती फसल को अच्छा भाव मिलता है.
नर्सरी पद्धति से करें मजबूत शुरुआत
अगेती खेती में बीजों को पहले पॉलीथिन ट्रे या छोटे कप में तैयार किया जाता है. करीब पंद्रह से बीस दिन में पौधे मजबूत हो जाते हैं. इसके बाद उन्हें मुख्य खेत में रोप दिया जाता है. इस तरीके से पौधों की जीवित रहने की दर बढ़ती है और खेत में एक समान वृद्धि होती है. रोपाई के समय पौधों के बीच पैंतालीस से साठ सेंटीमीटर और कतारों के बीच लगभग डेढ़ मीटर दूरी रखना जरूरी है ताकि बेलों को फैलने की पर्याप्त जगह मिल सके.
ये भी पढ़ें आलू के बाद जायद मक्का की खेती से बढ़ाएं मुनाफा जानें सही बुवाई और उत्पादन का वैज्ञानिक तरीकामिट्टी और खाद का सही चुनाव देगा बेहतर परिणाम
खीरे की खेती के लिए बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है जिसमें जल निकासी की अच्छी व्यवस्था हो. खेत की दो से तीन बार गहरी जुताई करके मिट्टी को भुरभुरी बना लेना चाहिए. प्रति हेक्टेयर बीस से पच्चीस टन सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाने से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है. एक हेक्टेयर क्षेत्र के लिए दो से ढाई किलोग्राम बीज पर्याप्त होते हैं. संतुलित पोषण के लिए प्रति एकड़ चालीस किलोग्राम नाइट्रोजन बीस किलोग्राम फास्फोरस और बीस किलोग्राम पोटाश का प्रयोग लाभकारी रहता है.
सिंचाई प्रबंधन से बढ़ेगी पैदावार
रोपाई के तुरंत बाद पहली सिंचाई करनी चाहिए. इसके बाद मिट्टी की नमी बनाए रखने के लिए हल्की सिंचाई जरूरी है. अधिक पानी देने से जड़ें सड़ सकती हैं इसलिए नियंत्रित सिंचाई करें. ड्रिप प्रणाली या छोटी नालियों से पानी देना बेहतर रहता है. खेत में मेढ़ या बेड बनाकर रोपाई करने से जल निकासी आसान हो जाती है और पौधे स्वस्थ रहते हैं.
45 से 50 दिन में शुरू होगी तुड़ाई
अगर सभी वैज्ञानिक तरीके अपनाए जाएं तो रोपाई के लगभग पैंतालीस से पचास दिन बाद फल आना शुरू हो जाता है. अगेती फसल बाजार में जल्दी पहुंचती है इसलिए सामान्य से बेहतर दाम मिलते हैं. सही योजना और मेहनत के साथ यह खेती आय का मजबूत साधन बन सकती है.
फरवरी में अगेती खीरे की खेती एक समझदारी भरा कदम है. नर्सरी पद्धति संतुलित खाद और नियंत्रित सिंचाई से न केवल पैदावार बढ़ती है बल्कि कम लागत में अधिक मुनाफा भी संभव है. सही समय पर सही तकनीक अपनाकर आप गर्मी के मौसम में अच्छी कमाई कर सकते हैं.
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युवा और ऊर्जावान पत्रकार चयन प्रजापत 'रॉयल बुलेटिन' के लिए मध्य प्रदेश के इंदौर से रिपोर्टिंग कर रहे हैं। आपकी मुख्य विशेषज्ञता खेल (Sports), कृषि (Farming) और ऑटोमोबाइल (Automobile) सेक्टर में है। चयन प्रजापत इन विषयों की तकनीकी समझ के साथ-साथ ज़मीनी हकीकत को अपनी खबरों में पिरोने के लिए जाने जाते हैं। इंदौर और मालवा क्षेत्र की खबरों के साथ-साथ ऑटोमोबाइल और खेल जगत की विशेष कवरेज के लिए आप रॉयल बुलेटिन के एक महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।

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