राज्यसभा में अनूठी पहल: चर्चा खत्म होने के बाद भी विपक्ष ने बुलंद की आवाज; सभापति ने दिया मौका
नई दिल्ली- सामान्य परंपरा के अनुसार संसद में जब किसी विषय पर चर्चा समाप्त हो जाती है तो उसके बाद कोई और हस्तक्षेप नहीं होता। चर्चा समाप्त होने के बाद सांसदों को बोलने का अवसर नहीं मिलता और संबंधित विभाग के मंत्री उत्तर देना शुरू करते हैं। हालांकि, मंगलवार को राज्यसभा में इससे अलग नजारा देखने मिला। संसद में सोमवार को पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के कार्यकरण पर चर्चा शुरू व पूरी की गई थी। विपक्ष ने सोमवार को सदन से वॉक आउट किया था। इसके कारण विपक्षी सांसद सोमवार को इस चर्चा में शामिल नहीं हो सके थे। ऐसे में सभापति सीपी राधाकृष्णन ने मंगलवार को कांग्रेस सांसद को चर्चा में शामिल होने का अवसर दिया।
हालांकि, इस विषय पर चर्चा सोमवार को पूरी हो गई थी और मंगलवार को विभाग के मंत्री भूपेन्द्र यादव ने इस पर जवाब देना था, लेकिन केंद्रीय मंत्री के जवाब से पहले इस विषय पर सभापति ने कहा, “लोकतंत्र की असली भावना चर्चा, संवाद और बहस में ही निहित है। मेरा हमेशा प्रयास रहा है कि इस सदन के अधिक से अधिक सदस्यों को अपनी बात रखने का अवसर मिले और सत्ता पक्ष तथा विपक्ष दोनों एक-दूसरे को सुनें। इसी दृष्टि से, इस अवसर पर मैं विशेष मामले के रूप में कांग्रेस के मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) के अनुरोध को स्वीकार कर रहा हूं और कांग्रेस सांसद नीरज डांगी को अंतिम वक्ता के रूप में चर्चा में भाग लेने की अनुमति दे रहा हूं।” इसके उपरांत कांग्रेस सांसद नीरज डांगी ने विस्तार से इस विषय पर अपनी बात सदन के समक्ष रखी। नीरज डांगी के बोलने से पहले सभापति ने अन्य विपक्षी सांसदों से कहा, “यह कोई भेदभाव नहीं है, यह केवल लोकतंत्र की भावना है।
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मैं आपसे प्रतीकात्मक रूप से अनुरोध कर रहा हूं कि यह कार्यवाही किसी के द्वारा उद्धृत न की जाए। यह केवल प्रतीकात्मक व्यवस्था है ताकि विपक्ष भी चर्चा में भाग ले सके।” सभापति ने कहा कि लोकतंत्र में यह समझना होगा कि दोनों यानी सत्ता पक्ष व विपक्ष महत्वपूर्ण होते हैं। इसीलिए विपक्ष को प्रतीकात्मक रूप से बोलने का एक अवसर दिया गया। इस दौरान कई अन्य विपक्षी दलों के सांसदों ने भी इस विषय पर बोलने की अनुमति मांगी, लेकिन सभापति ने कहा कि वह ऐसा नहीं कर सकते हैं। वह किसी के साथ भेदभाव नहीं कर रहे, बल्कि इसे पक्ष और विपक्ष के रूप में देख रहे हैं। विपक्ष को प्रतीकात्मक रूप से इस कार्रवाई में भाग लेने के लिए अवसर दे रहे हैं। उन्होंने अन्य दलों के सांसदों से इसे किसी के पक्ष में लिया गया निर्णय न मानने को कहा। उन्होंने कहा कि इसमें किसी प्रकार का भेदभाव नहीं है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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