मुजफ्फरनगर: गुर्जर समाज का ऐतिहासिक फैसला; मृत्यु भोज और शादियों में दहेज प्रदर्शन पर पूर्ण प्रतिबंध, 'जय किसान आंदोलन' का हुआ शंखनाद

मुजफ्फरनगर। गुर्जर समाज ने समाज में व्याप्त कुरीतियों को जड़ से मिटाने और किसानों की आवाज बुलंद करने के लिए एक बड़ी मुहिम का आगाज किया है। अंतरराष्ट्रीय गुर्जर दिवस के अवसर पर आयोजित गुर्जर सद्भावना सभा की बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि अब तेरहवीं पर 'ब्रह्मभोज' और शादियों में 'दहेज की नुमाइश' पर पूरी तरह रोक रहेगी। इसके साथ ही स्थानीय मुद्दों और किसानों के हक की लड़ाई लड़ने के लिए 'जय किसान आंदोलन' नामक नए संगठन की नींव भी रखी गई है।
तेरहवीं पर ब्रह्मभोज बंद; शोक सभाओं में नहीं होगी भाषणबाजी
गुर्जर छात्रावास में हुई पंचायत में समाज के पंचों ने कड़े फैसले लेते हुए कहा कि मृत्यु भोज एक सामाजिक कुरीति है। अब तेरहवीं और रस्म पगड़ी पर ब्रह्मभोज आयोजित नहीं होगा। दूर-दराज से आने वाले रिश्तेदारों के लिए केवल सादा भोजन बनेगा। शोक सभाओं में अनावश्यक भाषणबाजी और शोक संदेश पढ़ने की परंपरा को भी तत्काल प्रभाव से बंद करने का निर्णय लिया गया है।
शादियों में व्हाट्सएप से निमंत्रण; घी-बुरा और दाल-चावल को प्राथमिकता
विवाह समारोहों में फिजूलखर्ची रोकने के लिए सभा ने तय किया है कि अब दहेज की लिस्ट पढ़ने और सामान के प्रदर्शन पर प्रतिबंध रहेगा। शादियों में भारी भीड़ जुटाने के बजाय फोन या व्हाट्सएप के माध्यम से दिए गए निमंत्रण को ही पर्याप्त माना जाएगा। खान-पान में पुरानी परंपराओं को जीवंत करते हुए घी-बुरा और दाल-चावल जैसे सादे भोजन को प्राथमिकता दी जाएगी। धार्मिक आयोजनों में शोर-शराबे और पाखंड से बचकर वेदों व गीता के अध्ययन का आह्वान किया गया है।
'जय किसान आंदोलन' का गठन; बिना चंदे के लड़ेंगे हक की लड़ाई
समाज के राजनीतिक और स्थानीय हितों की रक्षा के लिए 'जय किसान आंदोलन' के गठन की घोषणा की गई। पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इस संगठन में कोई सदस्यता शुल्क या चंदा नहीं लिया जाएगा। जिलाध्यक्ष पवन चौहान और मंडल अध्यक्ष वेदपाल सिंह गुर्जर ने कहा कि संगठन का उद्देश्य राजनीति में समाज का उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है। इस मुहिम को सफल बनाने के लिए गुर्जर सद्भावना सभा ने पूरे समाज से एकजुट होने की अपील की है।
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