मुज़फ्फरनगर में नसीरपुर विवाद का पटाक्षेप, टिकैत और हरेंद्र मलिक ने कराया समझौता, दोनों महापंचायतें रद्द, सिसौली में पंचायत में जुटे गणमान्य लोग
भाकियू अध्यक्ष और सांसद की सूझबूझ से थमा 'जातीय संघर्ष' का शोर; क्षत्रिय और कश्यप समाज ने लिया भाईचारे का संकल्प
मुजफ्फरनगर (रॉयल बुलेटिन)। जनपद के तितावी थाना क्षेत्र स्थित ग्राम नसीरपुर में पिछले एक सप्ताह से जारी तनाव का बुधवार को सिसौली में सुखद अंत हो गया। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत और मुजफ्फरनगर के सांसद हरेंद्र मलिक की सूझबूझ और प्रभावी मध्यस्थता ने जनपद को एक बड़े जातीय संघर्ष की आग में झुलसने से बचा लिया। सिसौली स्थित किसान भवन में घंटों चली मैराथन वार्ता के बाद दोनों पक्षों ने गिले-शिकवे भुलाकर हाथ मिला लिया, जिसके बाद आगामी 14 मार्च को होने वाली दोनों विरोधी महापंचायतों को तत्काल प्रभाव से रद्द करने की घोषणा की गई।
क्या था पूरा विवाद?
विवाद की शुरुआत 6 मार्च 2026 को हुई थी, जब नसीरपुर गांव में मामूली कहासुनी के बाद कश्यप समाज के युवक दुष्यंत की बेरहमी से पिटाई कर दी गई थी। इस मामले में किसान नेता ठाकुर पूरन सिंह समेत उनके बेटों और भाई पर आरोप लगे थे। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 3 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
लेकिन मामला यहीं नहीं रुका। इस घटना ने देखते ही देखते जातीय रंग ले लिया। एक ओर क्षत्रिय समाज ने 'सम्मान बचाओ महापंचायत' का ऐलान किया, तो दूसरी ओर कश्यप समाज ने भी अपनी ताकत दिखाने के लिए महापंचायत बुला ली। दोनों पक्षों द्वारा 14 मार्च की तारीख तय किए जाने से प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए थे और पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में तनाव की स्थिति बन गई थी।

🤝 सिसौली में हुआ फैसला
बढ़ते तनाव को देखते हुए बुधवार को सिसौली में एक बड़ी बैठक बुलाई गई। यहाँ दोनों समाजों के जिम्मेदार लोग, खाप चौधरी और राजनीतिक दिग्गज एक मेज पर बैठे।
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नेताओं की पहल: चौधरी नरेश टिकैत और सांसद हरेंद्र मलिक ने दोनों पक्षों को समझाया कि आपसी विवाद से केवल समाज का नुकसान होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि न्याय की लड़ाई कानून के दायरे में लड़ी जानी चाहिए, न कि सड़कों पर शक्ति प्रदर्शन करके।
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महापंचायतें रद्द: ठाकुर पूरन सिंह और कश्यप समाज के प्रतिनिधियों ने वरिष्ठ नेताओं के सम्मान में अपनी-अपनी प्रस्तावित महापंचायतें वापस ले लीं।
समझौते के बाद चौधरी नरेश टिकैत ने कहा, "मुजफ्फरनगर का इतिहास भाईचारे का रहा है। छोटी-मोटी बातों को बड़ा बनाकर अपनी एकता को कमजोर नहीं करना चाहिए। आज की पंचायत ने साबित कर दिया कि बातचीत से हर मसला हल हो सकता है।"
वहीं, सांसद हरेंद्र मलिक ने दोनों पक्षों का आभार जताते हुए कहा, "हमारा लक्ष्य क्षेत्र में शांति और विकास है। टकराव से केवल दूरियाँ बढ़ती हैं। मुझे खुशी है कि दोनों समाजों ने परिपक्वता दिखाते हुए शांति का रास्ता चुना।"
इस समझौते के बाद नसीरपुर और आसपास के गांवों में तैनात अतिरिक्त पुलिस बल को राहत मिलने की उम्मीद है। दोनों पक्षों ने संकल्प लिया है कि वे भविष्य में किसी भी विवाद को आपसी संवाद से सुलझाएंगे और क्षेत्र में सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रखेंगे।
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