मुजफ्फरनगर। जनपद में दबंगों के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि अब बुजुर्ग दंपति को न्याय के लिए मीडिया की शरण लेनी पड़ रही है। खालापार थाना क्षेत्र के साउथ खालापार निवासी एक पीड़ित परिवार ने मंगलवार को मीडिया सेंटर पर प्रेस वार्ता कर अपनी आपबीती सुनाई। पीड़ित सलमा और उनके पति फजल अहमद का दर्द उस समय छलक पड़ा जब उन्होंने बताया कि किस तरह दबंगों ने न केवल उनके घर में घुसकर मारपीट की, बल्कि उनकी पुश्तैनी संपत्ति पर भी अवैध कब्जा जमा लिया है।
पीड़ितों का आरोप है कि इकराम, इसरार, उमेर, आजाद और शादाब जैसे दबंग पिछले काफी समय से उनका उत्पीड़न कर रहे हैं। सलमा ने बताया कि वर्ष 1980 से वे अपने प्लॉट पर रह रहे हैं, लेकिन अब उसे छीनने की कोशिश की जा रही है।
जुल्म की दास्तां: बहू का हुआ गर्भपात, बुजुर्ग की तोड़ी पसली
पीड़ित परिवार ने दबंगों की बर्बरता का जो ब्यौरा दिया, वह रूह कंपा देने वाला है:
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गर्भपात का आरोप: पीड़ितों के अनुसार, इकराम और उसके साथियों ने मारपीट के दौरान उनकी पुत्रवधु अप्सरा के पेट में लात मारी, जिससे उसे अत्यधिक रक्तस्राव हुआ और उसका गर्भपात हो गया। इस मामले में कोर्ट के आदेश पर एफआईआर तो हुई, लेकिन आरोप है कि पुलिस ने धाराओं को हल्का कर चार्जशीट दाखिल कर दी।
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ताजा हमला: 3 और 9 फरवरी 2025 को आरोपियों ने घर में घुसकर तांडव मचाया। फजल अहमद की पसली तोड़ दी गई, सीसीटीवी कैमरे तोड़ दिए गए और लूटपाट की गई।
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पुलिस की बेरुखी: सलमा का आरोप है कि घटना के बाद थाना खालापार पुलिस ने न तो समय पर मेडिकल कराया और न ही कोई मदद की। बुजुर्ग दंपति पूरी रात अस्पताल और एसएसपी कार्यालय के बाहर न्याय की आस में बैठे रहे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लगाई न्याय की गुहार
प्रेस वार्ता के दौरान मौजूद लताफत अली ने भी अपने वैध प्लॉट पर इन्हीं दबंगों द्वारा अवैध कब्जे का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि दस्तावेज पूरी तरह वैध होने के बावजूद दबंग निर्माण कार्य कर उन्हें बेदखल कर रहे हैं। पीड़ित परिवार ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) से मांग की है कि इस मामले की जांच के लिए खालापार थाने से अलग एक विशेष टीम गठित की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही अवैध कब्जा मुक्त नहीं कराया गया और आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई, तो कोई भी अप्रिय घटना घट सकती है।
यह मामला जिले की कानून व्यवस्था और प्रशासनिक सक्रियता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। क्या 'जीरो टॉलरेंस' की नीति का दम भरने वाली पुलिस इन बुजुर्गों को उनके अपने ही घर में सुरक्षित महसूस करा पाएगी?

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