पुलिस के अनुसार, नकली टैबलेट सोनीपत की 'सुबको लैबोरेट्रीज' में बनाए जाते थे, डिब्बियां और ढक्कन मेरठ के जमना नगर से आते थे, जबकि रैपर की प्रिंटिंग मेरठ के खैरनगर चौपला स्थित एक प्रेस में होती थी। गिरोह का एक सदस्य जोनी सिंह मोबाइल सिम उपलब्ध कराता था, जिससे मेडिकल फर्मों से सप्लाई चेन संचालित होती थी।
इस मामले की शुरुआत 3 जनवरी 2026 को शिकायत मिलने के बाद हुई थी। फिलहाल गिरफ्तार 5 आरोपियों को जेल भेज दिया गया है, लेकिन पुलिस की जांच जारी है और 6 अन्य वांछित आरोपियों की तलाश जारी है।
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नकली दवाइयों का यह काला कारोबार सीधे तौर पर लोगों की जान के लिए खतरा साबित हो सकता था। गाजियाबाद पुलिस की सतर्कता ने समय रहते इस खतरे को टाल दिया।

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