डीसीपी देहात सुरेंद्रनाथ तिवारी ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों का नेटवर्क दिल्ली-एनसीआर के अलग-अलग इलाकों में फैला हुआ था। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने 'एन पी ट्रेडिंग' नाम की फर्म बनाकर फर्जी जीएसटी नंबर और नकली ड्रग लाइसेंस के जरिए यह काला कारोबार चलाया।
ये भी पढ़ें यमुना प्राधिकरण ने स्पार्क मिंडा को 7 एकड़ भूखंड का लेटर ऑफ़ इनटेंट सौंपा, 220 करोड़ निवेश की योजना पुलिस के अनुसार, नकली टैबलेट सोनीपत की 'सुबको लैबोरेट्रीज' में बनाए जाते थे, डिब्बियां और ढक्कन मेरठ के जमना नगर से आते थे, जबकि रैपर की प्रिंटिंग मेरठ के खैरनगर चौपला स्थित एक प्रेस में होती थी। गिरोह का एक सदस्य जोनी सिंह मोबाइल सिम उपलब्ध कराता था, जिससे मेडिकल फर्मों से सप्लाई चेन संचालित होती थी।
ये भी पढ़ें बदलेगा एनसीआर में मौसम का मिजाज, बादल और हल्की बारिश से मिलेगी राहत; एक्यूआई भी येलो जोन में इस मामले की शुरुआत 3 जनवरी 2026 को शिकायत मिलने के बाद हुई थी। फिलहाल गिरफ्तार 5 आरोपियों को जेल भेज दिया गया है, लेकिन पुलिस की जांच जारी है और 6 अन्य वांछित आरोपियों की तलाश जारी है।
नकली दवाइयों का यह काला कारोबार सीधे तौर पर लोगों की जान के लिए खतरा साबित हो सकता था। गाजियाबाद पुलिस की सतर्कता ने समय रहते इस खतरे को टाल दिया।

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