तुर्कमान गेट पत्थरबाजी मामले में 5 आरोपितों को नहीं मिली राहत, कोर्ट ने खारिज की जमानत याचिका

नई दिल्ली। तीस हजारी कोर्ट के जुडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास सायेशा चड्ढा ने फैज-ए-इलाही मस्जिद का अतिक्रमण हटाने के दौरान पत्थर चलाने के पांच आरोपितों की जमानत याचिका खारिज कर दी है। ने जमानत याचिकाएं खारिज करने का आदेश दिया। कोर्ट ने 13 जनवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। तीस हजारी कोर्ट ने 8 जनवरी को पांचों आरोपितों को 13 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा था।
कोर्ट ने आरोपों की गंभीरता और जांच के प्रारंभिक स्तर को देखते हुए मोहम्मद अरीब, काशिफ, अदनान, मोहम्मद कैफ और समीर की जमानत याचिकाएं खारिज करने का आदेश दिया। दिल्ली पुलिस ने इन आरोपितों के खिलाफ चांदनी महल थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 221, 132, 121, 191, 223ए और प्रिवेंशन ऑफ डैमेज टू पब्लिक प्रोपर्टी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की थी। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में अब तक एक नाबालिग समेत 12 आरोपितों की गिरफ्तारी की है।
दिल्ली पुलिस ने 8 जनवरी को अफान, आदिल, शाहनवाज, हमजा, अतहर और उबेद को गिरफ्तार किया था। ये सभी तुर्कमान गेट इलाके के रहने वाले हैं। सात-आठ जनवरी की मध्य रात को रामलीला मैदान इलाके में फैज ए इलाही मस्जिद के पास अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई की गई। अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई के बाद हिंसा भड़क गई और लोगों ने पुलिसकर्मियों पर पथराव किया। पथराव में पांच पुलिसकर्मी घायल हो गये थे।
दिल्ली पुलिस के मुताबिक एक सोशल मीडिया पोस्ट की गई थी कि तुर्कमान गेट के सामने की मस्जिद को अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई में गिराया जा रहा है। उसके बाद लोग वहां जमा होने लगे। दिल्ली पुलिस के मुताबिक करीब डेढ़ से दौ सौ लोग अतिक्रमण हटाने गए अमले पर पत्थर बरसाने में शामिल थे।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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