नोएडा। इंदौर में हाल ही में पीने के पानी में प्रदूषण की घटना ने जनपद गौतमबुद्व नगर में जल प्रबंधन में कमियों को लेकर कई तरह के सवाल लोगों द्वारा उठाये जाने लगे हंै। हालांकि नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों का दावा है कि सप्लाई की पानी में कोई कमी नहीं है।
शुक्रवार को नोएडा में सप्लाई की पानी की गुणवत्ता को लेकर प्राधिकरण के सीईओ डा. लोकेश एम ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक के दौरान उन्होंने जनहित के मुद्दों, शहर के बुनियादी ढांचे और स्वच्छता व्यवस्था को लेकर कड़े निर्देश दिए। बैठक के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक सेवाओं में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इंदौर में जल प्रदूषण के कारण हुई जनहानि को गंभीरता से लेते हुए सीईओ महोदय ने जल विभागके अधिकारियों की एक उच्च स्तरीय तकनीकी समिति गठित की है। यह समिति पाइपलाइनों में रिसाव और जंग लगने की समस्याओं की पहचान तथा जलाशयों और वॉटर एटीएम में पानी की शुद्धता की जांच करेगी। यह समिति विभिन्न क्षेत्रों से सैंपल लेकर अपनी जांच की विस्तृत रिपोर्ट जल्द से जल्द सीईओ को सौंपेगी, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
बैठक के दौरान सीईओ द्वारा गंगा जल परियोजना के संबंध में निर्देश दिए गए कि 80 क्यूसेक गंगा जल परियोजना से संबंधित कार्य जनवरी 2026 तक पूरा किया जाए। कार्यों की समीक्षा की दौरान सड़क बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए एसीईओ वंदना त्रिपाठी और ओएसडी महेंद्र प्रसाद की सदस्यता वाली एक विशेष टीम गठित की गई।
वहीं सीईओ के निर्देशों के बाद इस टीम ने आज मास्टर प्लान रोड-3 के पूरे स्ट्रेच का दौरा किया। वहीं इस संबंध में 15 दिनों के भीतर इसके सुधार के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत की जायेगी। तालाबों के निर्माण कार्य की धीमी गति पर सीईओ ने नाराजगी व्यक्तकी। उन्होंने तालाबों के निर्माण में देरी करने वाले ठेकेदारों और अधिकारियों को कार्य में तेजी लाने की चेतावनी दी।
स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक बनाने के लिए सीईओ ने सफाई के लिए अत्याधुनिक मैकेनाइज्ड मशीनों और नालों की सफाई के लिए मीडियम साइज उपकरणों की खरीद के निर्देश जारी किए। वहीं शहर में व्याप्त गंदगी की जानकारी मिलने पर सीईओ ने जन स्वास्थ्य विभाग के तीन सहायक परियोजना अभियंताओं (Assistant Project Engineer) उमेश चंद, राहुल गुप्ता तथा सुशील कुमार को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए इनके वेतन पर अगले आदेश तक रोक लगा दी।