नोएडा: लापरवाह DTC चालक ने कुचला था मासूम का भविष्य, 6 साल बाद कोर्ट ने सुनाई 2 साल की कैद
दर्दनाक हादसे का इंसाफ: कराटे सीखकर लौट रही छात्रा का काटना पड़ा था पैर, अब सरकारी चालक को जेल और जुर्माना
नोएडा। उत्तर प्रदेश के नोएडा में करीब 6 वर्ष पूर्व एक दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) के बस चालक की घोर लापरवाही ने एक उभरती हुई खिलाड़ी का भविष्य अंधकार में धकेल दिया था। इस चर्चित मामले में गौतमबुद्धनगर न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दोषी सरकारी बस चालक को सलाखों के पीछे भेज दिया है। कोर्ट ने लापरवाही से वाहन चलाकर लड़की को ताउम्र के लिए अपंग बनाने के जुर्म में चालक को 2 साल के कारावास और आर्थिक दंड की सजा सुनाई है।
कराटे सीखकर लौट रही छात्रा बनी थी शिकार
अभियोजन अधिकारी गौतमबुद्धनगर राजेश शुक्ला ने बताया कि यह हृदयविदारक घटना 24 मई 2019 की है। शाम करीब 3:45 बजे, वादी ब्रह्माशंकर की बेटी 'लोरी' अपनी कराटे क्लास खत्म कर घर की ओर लौट रही थी। वह नोएडा सेक्टर-20 के पास पहुंची ही थी कि डीटीसी बस संख्या के चालक किशनलाल ने बस को अत्यंत तेज गति और लापरवाही से चलाते हुए लोरी को अपनी चपेट में ले लिया।
काटना पड़ा बायां पैर, कृत्रिम अंग का सहारा
ये भी पढ़ें शुरुआती घंटे में शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव, सीमित दायरे में कारोबार कर रहे सेंसेक्स और निफ्टीहादसा इतना भीषण था कि बस का भारी पहिया मासूम लोरी के बाएं पैर के ऊपर से गुजर गया। गंभीर रूप से घायल छात्रा को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ उसकी जान बचाने के लिए डॉक्टरों को उसका बायां पैर काटना पड़ा। इस हादसे ने न केवल लोरी को शारीरिक रूप से अक्षम बनाया, बल्कि उसे जीवन भर के लिए कृत्रिम पैर (Artificial Leg) के सहारे रहने पर मजबूर कर दिया।
न्यायालय ने बयानों और साक्ष्यों पर लगाई मुहर
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम (ACJM-1) मयंक त्रिपाठी के न्यायालय ने पीड़िता लोरी और उसके पिता के बयानों को आधार मानते हुए अभियुक्त किशनलाल को धारा 279 (लापरवाही से वाहन चलाना) और 338 (गंभीर चोट पहुंचाना) भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत दोषी पाया। सेक्टर-24 थाने में दर्ज इस मुकदमे में कोर्ट ने आरोपी को 2 वर्ष की अधिकतम सजा और भारी जुर्माने से दंडित किया है।
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