नोएडा। सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेट फार्म पर विदेशी कंपनियों में उच्च वेतन पर नौकरी करने का लुभावने विज्ञापन जारी कर ठगी करने वाले दो ठगों को थाना सेक्टर-126 पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस ने अभियुक्तों के कब्जे से 9 भारतीय पासपोर्ट, 4 मोबाइल फोन, 1 लैपटॉप, 7 फर्जी व कूटरचित जॉब पम्पलेट, 7 फर्जी एयरलाइन टिकट, 9 वीज़ा के फर्जी प्रिंटआउट व लोगों से धोखाधडी कर अर्जित किये गये 73 हजार 5 सौ रुपये नकद बरामद किया है। इन बदमाशों के खिलाफ ठगी व धोखाधड़ी के पांच मुकदमे पूर्व में पंजीकृत है।
एडीसीपी नोएडा मनीषा सिंह ने एक प्रेस वार्ता के दौरान बताया कि ठगी के शिकार एक पीड़ित युवक द्वारा थाना सेक्टर-126 पुलिस को सूचना दी गई थी कि अज्ञात व्यक्तियों द्वारा फर्जी व कूटरचित विदेश में नौकरी का विज्ञापन दिखाकर उससे लगभग 1.50 लाख रुपये की ठगी की गई है। उन्होंने बताया कि पीड़ित की शिकायत पर के आधार पर अभियोग पंजीकृत कर थाना पुलिस मामले की जांच कर रही थी।
उन्होंने बताया कि इसी बीच आज थाना सेक्टर-126 पुलिस टीम ने लोकल इंटेलिजेंस की सहायता से मिली एक सूचना के आधार पर उक्त मुकदमा से संबंधित दो अभियुक्तों नियाज अहमद उर्फ अरमान पुत्र साजिद अली तथा राजू शाह पुत्र राम प्रवेश शाह को डीएमआईसी टी-प्वाइंट से सुपरनोवा बिल्डिंग सेक्टर-94 की ओर जाने वाले मार्ग से गिरफ्तार किया है।
एडीसीपी ने बताया कि पूछताछ के दौरान पता चला है कि अभियुक्त संगठित एवं सुनियोजित तरीके से कार्य करते थे। सबसे पहले वे लैपटॉप के माध्यम से विदेशी कंपनियों के नाम पर आकर्षक एवं लुभावने फर्जी व कूटरचित नौकरी विज्ञापन तैयार करते थे, जिनमें ऊंची सैलरी, फ्री वीज़ा, फ्री टिकट, सीमित सीटें एवं तत्काल जॉइनिंग का झांसा दिया जाता था। इसके पश्चात अभियुक्त इंटरनेट पर ऐसे व्हाट्सएप ग्रुप, टेलीग्राम चैनल, फेसबुक पेज एवं अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म खोजते थे, जहां भारत में पंजीकृत बड़ी मैनपावर कंपनियां, विदेश रोजगार कंसल्टेंसी अथवा नौकरी से संबंधित समूह सक्रिय हैं। उन्होंने बताया कि अभियुक्त इन ग्रुपों में सदस्य बनने के लिए रिक्वेस्ट भेजते थे और एक बार जुड़ने के बाद अपने द्वारा तैयार किए गए फर्जी व कूटरचित कूटरचित विज्ञापन पम्पलेट, जिन पर फर्जी कंपनी (FUTURE LIGHT MANPOWER) का नाम डालकर व अपने मोबाइल नंबर व ईमेल आईडी अंकित कर उक्त ग्रुपों में प्रसारित कर देते थे। जिसो अधिक से अधिक बेरोजगार लोग सीधे उनसे संपर्क करें।
एडीसीपी ने बताया कि जब इच्छुक व्यक्ति संपर्क करते थे तो अभियुक्त केवल व्हाट्सएप कॉल के माध्यम से बातचीत करते थे ताकि अपनी वास्तविक पहचान, स्थान एवं ट्रैकिंग से बच सकें। इसके बाद वे फर्जी व कूटरचित ऑफर लेटर, वीज़ा एवं विभिन्न अंतरराष्ट्रीय एयरलाइनों के टिकटों के कूटरचित प्रिंटआउट भेजकर पीड़ितों का विश्वास अर्जित करते थे। इसके बाद प्रोसेसिंग फीस, वीज़ा चार्ज, मेडिकल फीस, एम्बेसी अप्रूवल, टिकट कन्फर्मेशन एवं अन्य औपचारिकताओं के नाम पर चरणबद्ध तरीके से मोटी धनराशि वसूलते थे। उन्होंने बताया कि वीज़ा प्रक्रिया के बहाने ठग पीड़ितों के मूल पासपोर्ट अपने कब्जे में रख लेते थे ताकि पीड़ित उन पर निर्भर बना रहे और अतिरिक्त धन देने के लिए बाध्य हो।
उन्होंने बताया कि बरामद मोबाइल फोनों के गहन परीक्षण से यह तथ्य प्रकाश में आया है कि अभियुक्त अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय जॉब ग्रुपों से जुड़े हुए थे। अभियुक्तगण अब तक लगभग 100 से अधिक व्यक्तियों को इसी प्रकार झांसा देकर अपना शिकार बना चुके हैं। अभियुक्तों द्वारा अब तक लगभग 70 लाख रुपये से अधिक की धोखाधड़ी कर अवैध धन अर्जित किया जाना प्रकाश में आया है। उन्होंने बताया कि कि अभियुक्तों के अन्य आपराधिक इतिहास के बारे में विस्तार जानकारी एकत्र की जा रही है।
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