केरल मुख्यमंत्री विजयन को बड़ा झटका, उनके प्रिसिंपल सेक्रेटरी रहे शिवशंकर को किया ईडी ने गिरफ्तार
कोच्चि| केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन को झटका देते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उनके पूर्व प्रिसिंपल सेक्रेटरी एम. शिवशंकर को केरल बाढ़ राहत में कथित अनियमितताओं से संबंधित धन शोधन निवारण मामले में गिरफ्तार कर लिया है। शिवशंकर को मंगलवार रात को गिरफ्तार किया गया और ईडी अब अदालत में पेश किए जाने पर […]
कोच्चि| केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन को झटका देते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उनके पूर्व प्रिसिंपल सेक्रेटरी एम. शिवशंकर को केरल बाढ़ राहत में कथित अनियमितताओं से संबंधित धन शोधन निवारण मामले में गिरफ्तार कर लिया है। शिवशंकर को मंगलवार रात को गिरफ्तार किया गया और ईडी अब अदालत में पेश किए जाने पर उनकी हिरासत की मांग कर सकती है।
सोमवार से शुरू हुई दो दिन की पूछताछ के बाद एम. शिवशंकर को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी विजयन के पसंदीदा प्रोजेक्ट ‘लाइफ मिशन’ में चल रही जांच से संबंधित है, जिसमें कथित रूप से कॉन्ट्रैक्ट प्राप्त करने के लिए कमीशन के रूप में चार करोड़ रुपये से अधिक की बड़ी राशि का भुगतान किया गया, जिसे बिल्डर संतोष एपेन ने बाद में सीबीआई के सामने स्वीकार कर लिया।
इस मामले में केरल सरकार के प्रमुख प्रोजेक्ट में विदेशी योगदान नियमों का कथित उल्लंघन भी शामिल है। प्रोजेक्ट का उद्देश्य 2018 की विनाशकारी बाढ़ में अपना घर खो चुके गरीबों को घर उपलब्ध कराना था।
त्रिशूर जिले के वाडक्कनचेरी में प्रोजेक्ट तब विवादों में घिर गया, जब कांग्रेस के तत्कालीन विधायक अनिल अक्कारा ने बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए सीबीआई से संपर्क किया।
अक्कारा ने बुधवार को शिवशंकर की गिरफ्तारी पर प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि गिरफ्तारियां यहीं नहीं रुकनी चाहिए।
यह मामला जून 2020 में सोने की तस्करी का मामला सामने आने के बाद आया, जिसमें शिवशंकर जेल में बंद थे।
ईडी ने हाल ही में सोने की तस्करी के मामले में मुख्य आरोपी स्वप्ना सुरेश से पूछताछ की, साथ ही दो अन्य आरोपियों से भी पूछताछ की गई, जिसके बाद शिवशंकर को तलब किया गया।
स्वप्ना सुरेश और सरिथ दोनों, जो संयुक्त अरब अमीरात के वाणिज्य दूतावास में कार्यरत थे, बाद में लाइफ मिशन फंड की हेराफेरी में भी भूमिका निभाते पाए गए।
शिवशंकर के लिए परेशानी तब शुरू हुई जब जांच में एक लॉकर का पता चला, एक करोड़ रुपये थे। यह लॉकर स्वप्ना और शिवशंकर के करीबी एक चार्टर्ड अकाउंटेंट का था।
स्वप्ना ने शुरू में कहा था कि उसे कमीशन मिला है, लेकिन बाद में उसने अपने बयान बदल लिए और कहा कि यह पैसा शिवशंकर का है।
शिवशंकर से पूछताछ में इस बयान पर कोई ईडी को कुछ खास नहीं मिला लेकिन ईडी ने सबूतों के आधार पर उनकी गिरफ्तारी की।
इससे पहले, राज्य सरकार ने जांच रोकने के लिए केरल हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन याचिकाओं को खारिज कर दिया गया और कहा कि वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों और ठेकेदारों से जुड़े मामले में चल रही सीबीआई जांच जारी रहनी चाहिए।
सीबीआई ने जांच में पाया कि केरल सरकार की एक संस्था की ओर से निर्माण कर रही निजी कंपनी यूनिटेक को टेंडर के माध्यम से कॉन्ट्रैक्ट नहीं मिला था।
प्रोजेक्ट में 97 अपार्टमेंट और एक स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण शामिल था, और यह आरोप लगाया गया कि सोने की तस्करी के दोनों आरोपियों ने यूनिटैक के साथ बातचीत की और प्रोजेक्ट की लागत का 30 प्रतिशत को कमीशन लिया — 20 फीसदी यूएई अधिकारी को और 10 प्रतिशत स्वपना सुरेश और दूसरे लोगों को।
सीबीआई ने दावा किया कि शिवशंकर ने स्वप्ना सुरेश के साथ यूनिटैक के मालिक संतोष एपेन से उनके कक्ष में मुलाकात की और पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया।
इस बैठक में कथित तौर पर लाइफ मिशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी यू.वी. जोस भी मौजूद थे।
आपको यह खबर कैसी लगी? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में ज़रूर दे। आपकी राय रॉयल बुलेटिन को और बेहतर बनाने में बहुत उपयोगी होगी।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हमें फॉलो करें और हमसे जुड़े रहें।
(Follow us on social media platforms and stay connected with us.)
Youtube – https://www.youtube.com/@RoyalBulletinIndia
Facebook – https://www.facebook.com/royalbulletin
Instagram: https://www.instagram.com/royal.bulletin/
Twitter – https://twitter.com/royalbulletin
Whatsapp – https://chat.whatsapp.com/Haf4S3A5ZRlI6oGbKljJru
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
रॉयल बुलेटिन के संस्थापक एवं मुख्य संपादक अनिल रॉयल ने वर्ष 1985 में मात्र 17 वर्ष की आयु से मुज़फ्फरनगर की पावन भूमि से निर्भीक और जनपक्षधर पत्रकारिता का संकल्प लिया। बीते लगभग चार दशकों से वे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सशक्त और विश्वसनीय आवाज़ के रूप में पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं।
पत्रकारिता के अपने लंबे अनुभव के आधार पर उन्होंने वर्ष 2010 में नोएडा से रॉयल बुलेटिन के प्रिंट संस्करण का सफल विस्तार किया। समय के साथ बदलते मीडिया परिदृश्य को समझते हुए, उनके नेतृत्व में यह संस्थान आज एक मजबूत और प्रभावशाली डिजिटल समाचार मंच के रूप में स्थापित हो चुका है।
वर्तमान में रॉयल बुलेटिन की पहुँच न्यूज़ पोर्टल, फेसबुक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप सहित सभी प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर करोड़ों पाठकों तक है। प्रिंट और डिजिटल मीडिया के स्वामी एवं संपादक के रूप में अनुभव, सत्यनिष्ठा और जन-सरोकार उनकी पत्रकारिता की मूल आधारशिला रहे हैं।

टिप्पणियां