कालसर्प योग से डरें नहीं, समझें—यही बन सकता है सफलता का द्वार: महाशिवरात्रि पर विशेष ज्योतिषीय विश्लेषण
अशुभ नहीं, असाधारण उपलब्धियों का कारक भी है कालसर्प योग; जानें 12 प्रकार, प्रभाव और मुक्ति के अचूक उपाय
ज्योतिष शास्त्र में कालसर्प योग को लेकर समाज में लंबे समय से अनेक भ्रांतियाँ, आशंकाएँ और भय व्याप्त हैं। अधिकांश लोग इस योग का नाम सुनते ही मानसिक रूप से भयभीत हो जाते हैं और इसे अत्यंत अशुभ मान लेते हैं। परंतु, महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर भगवान शिव की आराधना के साथ यदि इस योग को समझा जाए, तो यह केवल दोष मात्र नहीं है। अनुभवी विद्वानों के मत के अनुसार, विशेष परिस्थितियों में यह असाधारण सफलता, वैश्विक प्रतिष्ठा और जीवन परिवर्तन का बड़ा कारण भी बन सकता है।
क्या है कालसर्प योग और कैसे होता है निर्माण?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब किसी जातक की कुंडली में सभी सात मुख्य ग्रह (सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि) छाया ग्रह 'राहु' और 'केतु' के मध्य स्थित हो जाते हैं, तब पूर्ण कालसर्प योग का निर्माण होता है। यदि इनमें से एक या दो ग्रह इस घेरे से बाहर निकल जाएं, तो इसे आंशिक कालसर्प योग कहा जाता है। इस योग का प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है कि यह कुंडली के किन भावों में बन रहा है।
कालसर्प योग के 12 प्रमुख प्रकार और उनके प्रभाव
कुंडली के अलग-अलग भावों में राहु-केतु की स्थिति के आधार पर 12 प्रकार के कालसर्प योग होते हैं:
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अनंत: मानसिक शांति में कमी, लेकिन संघर्ष के बाद बड़ी सफलता।
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कुलिक: स्वास्थ्य और धन संचय में बाधाएं।
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वासुकी: भाई-बहनों से विवाद और भाग्य में रुकावट।
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शंखपाल: माता के सुख और भूमि-मकान संबंधी समस्या।
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पद्म: शिक्षा और संतान प्राप्ति में विलंब।
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महापद्म: शत्रुओं से परेशानी लेकिन लंबी विदेश यात्रा के योग।
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तक्षक: वैवाहिक जीवन और व्यापारिक साझेदारी में तनाव।
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कर्कोटक: भाग्य में अड़चन और पैतृक संपत्ति विवाद।
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शंखचूड़: मान-सम्मान में उतार-चढ़ाव और सरकारी कार्य में बाधा।
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घातक: कार्यक्षेत्र और पिता के सुख में कमी।
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विषधर: नेत्र रोग और अनिद्रा की समस्या।
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शेषनाग: गुप्त शत्रु और अदालती मामलों का सामना।
प्रभाव: संघर्ष से शिखर तक की यात्रा
कालसर्प योग के जातक अक्सर जीवन में वियोग, अकेलापन या मानसिक दबाव महसूस करते हैं। सफलता मिलने में विलंब हो सकता है, लेकिन विशेष तथ्य यह है कि विश्व के कई महान व्यक्तित्वों की कुंडली में यह योग पाया गया है। जिन्होंने कठिन संघर्ष को अपनी शक्ति बनाया, उनके लिए यह योग राजयोग के समान फलदायी सिद्ध हुआ।
महाशिवरात्रि: कालसर्प दोष निवारण का सर्वोत्तम अवसर
भगवान शिव काल के भी काल हैं और सर्प उनके आभूषण हैं। महाशिवरात्रि के दिन किए गए उपाय इस दोष के नकारात्मक प्रभाव को शून्य कर देते हैं:
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रुद्राभिषेक: महाशिवरात्रि पर गंगा जल, दूध और शहद से शिवलिंग का अभिषेक करना सबसे प्रभावी उपाय है। लगातार 11 माह तक प्रत्येक माह शिवालय में एक रुद्राभिषेक कराना।
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नाग-नागिन पूजन: गंगा तट पर या शिवालय में चांदी या तांबे के नाग-नागिन के जोड़े की पूजा कर उन्हें जल में प्रवाहित करना या मंदिर में अर्पित करना।
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मंत्र साधना: 'ॐ नमः शिवाय' और नाग गायत्री मंत्र का सवा लाख बार जप करना अत्यंत शुभ है।
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तांबे का सर्प: जिस शिवालय में शिवलिंग पर नाग न हो, वहां विधि-विधान से तांबे का सर्प स्थापित कराएं।
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मोर पंख: शयन कक्ष और कार्यालय में मोर पंख रखने से राहु का नकारात्मक प्रभाव कम होता है।
- नाग पंचमी, महाशिवरात्रि या अमावस्या के दिन, गंगा तट पर स्नान
विशेष सलाह:
प्रत्येक व्यक्ति की कुंडली भिन्न होती है, इसलिए यह अत्यंत आवश्यक है कि—
अपनी कुंडली में कालसर्प योग किस भाव से किस भाव तक स्थित है, इसका सटीक परीक्षण कराएँ।
तत्पश्चात अनुभवी एवं विद्वान ज्योतिषाचार्य से भावानुसार पूजा-पाठ एवं उपाय करवाएँ।
अंधविश्वास से नहीं, सही ज्ञान और श्रद्धा से किया गया उपाय ही पूर्ण फल प्रदान करता है।
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लेखक के बारे में
मुज़फ्फरनगर के प्रमुख ज्योतिषविद संजय सक्सेना पिछले 25 वर्षों से 'शिवालिक राशिरत्न केंद्र' के माध्यम से ज्योतिष, वास्तु और रत्न विज्ञान के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए हैं। संजय जी को ज्योतिष की गहन और प्रामाणिक शिक्षा वेदपाठी भवन के विख्यात विद्वान प्रियशील चतुर्वेदी (रतन गुरु) जी के सानिध्य में प्राप्त हुई है। उल्लेखनीय है कि उनके गुरु रतन गुरु जी, काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के पूर्व कुलपति एवं सुप्रसिद्ध साहित्यकार स्वर्गीय सीता राम चतुर्वेदी जी के सुपुत्र हैं, जिससे संजय सक्सेना जी को एक अत्यंत समृद्ध और विद्वान गुरु-परंपरा का लाभ मिला है।
संजय सक्सेना जी की सबसे बड़ी विशेषज्ञता 'प्रश्न लग्न' में है। ज्योतिष की यह एक ऐसी विधा है जिसमें बिना जन्म कुंडली के भी जातक की तात्कालिक समस्याओं का सटीक विश्लेषण किया जा सकता है। अपनी इस विशेषज्ञता और ढाई दशकों के अनुभव के आधार पर वे न केवल सटीक भविष्यवाणी करते हैं, बल्कि वास्तु और रत्नों के माध्यम से प्रभावी समाधान भी प्रदान करते हैं। उनकी पारखी नज़र और शास्त्रीय ज्ञान ने उन्हें पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विश्वसनीय ज्योतिषियों में शामिल किया है। ज्योतिषीय परामर्श, वास्तु ज्ञान या शुद्ध रत्नों की जानकारी हेतु उनसे मोबाइल नंबर 9837400222 पर संपर्क किया जा सकता है।

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