अनमोल वचन
वेद का ऋषि परमपिता परमात्मा को माँ के रूप में सम्बोधित करते हुए याचना करता है:
"हे ऊष्मा के समान प्राणदायिनी माँ! आप आज हमें महान सन्मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करें। आप हमें महान सौभाग्य के लिए नियमपरायण बनाएँ, हमें यशोमय अद्भुत ऐश्वर्य प्रदान करें।
आप हमें मरणधर्मा मानव समाज के मध्य कीर्तिमान एवं यशस्वी बनाएँ।
आपकी कृपा से हमें यह ज्ञान है कि माँ की शक्ति अपार होती है, परन्तु इस अपार शक्ति का लाभ श्रद्धावान और सेवाभावी संतानों को ही प्राप्त होता है। यदि संतान माँ के हृदय को ठेस पहुँचाती है, तो निश्चित ही माँ के आशीष की तरंगें निष्क्रिय हो जाती हैं।
ये भी पढ़ें मिडिल ईस्ट संकट: भारत सरकार की बड़ी एडवाइजरी; विदेशी नागरिक वीजा के लिए FRRO से करें संपर्क
यशस्वी और कीर्तिमान जीवन के अधिकारी वे ही होते हैं, जो माता-पिता के प्रति अति आस्थावान और सम्मानजनक व्यवहार करने वाले हों। माता-पिता का पवित्र, धीर, विनम्र और अग्नि तुल्य तेजस्वी पुत्र ही अपनी शक्ति से संसार को पवित्र करता है।
इसलिए, हम आपसे स्वयं के लिए एक योग्य, आज्ञाकारी, श्रद्धावान और यशस्वी संतान बनने का आशीर्वाद चाहते हैं।"
रॉयल बुलेटिन से जुड़ें:
देश-प्रदेश की ताज़ा ख़बरों को सबसे पहले पढ़ने के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल को फॉलो करें:
आपको यह खबर कैसी लगी? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में ज़रूर दे। आपकी राय रॉयल बुलेटिन को और बेहतर बनाने में बहुत उपयोगी होगी।
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
रॉयल बुलेटिन के संस्थापक एवं मुख्य संपादक अनिल रॉयल ने वर्ष 1985 में मात्र 17 वर्ष की आयु से मुज़फ्फरनगर की पावन भूमि से निर्भीक और जनपक्षधर पत्रकारिता का संकल्प लिया। बीते लगभग चार दशकों से वे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सशक्त और विश्वसनीय आवाज़ के रूप में पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं।
पत्रकारिता के अपने लंबे अनुभव के आधार पर उन्होंने वर्ष 2010 में नोएडा से रॉयल बुलेटिन के प्रिंट संस्करण का सफल विस्तार किया। समय के साथ बदलते मीडिया परिदृश्य को समझते हुए, उनके नेतृत्व में यह संस्थान आज एक मजबूत और प्रभावशाली डिजिटल समाचार मंच के रूप में स्थापित हो चुका है।
वर्तमान में रॉयल बुलेटिन की पहुँच न्यूज़ पोर्टल, फेसबुक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप सहित सभी प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर करोड़ों पाठकों तक है। प्रिंट और डिजिटल मीडिया के स्वामी एवं संपादक के रूप में अनुभव, सत्यनिष्ठा और जन-सरोकार उनकी पत्रकारिता की मूल आधारशिला रहे हैं।

टिप्पणियां