घर में जरूर लगाएं ये तीन पौधे, त्वचा और पेट संबंधी रोगों से मिलेगा छुटकारा
नई दिल्ली। घर और आस-पास के क्षेत्र को खूबसूरत बनाने के लिए हम अक्सर फूल वाले पौधे लगाते हैं। कुछ पौधे घर की सुंदरता को बढ़ाने का काम करते हैं, जबकि कुछ पौधे औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं। आज हम आपको ऐसे तीन पौधों की जानकारी देंगे, जिनके पत्ते सेहत के लिए खजाना हैं और जिन्हें घर में लगाना भी आसान है। इस लिस्ट में मदार का पौधा, नीम का पौधा, और बेहया का पौधा शामिल है। नीम के पौधे को आंगन में लगा सकते हैं, या फिर उसके पत्तों को घर में स्टोर करके भी रख सकते हैं।
ये भी पढ़ें गर्भाशय को स्वस्थ रखने के लिए अपनाएं ये 4 आसान उपाय, हार्मोन संतुलन से प्रजनन क्षमता तक मिलेगा लाभमदार, नीम, और बेहया तीनों का जिक्र आयुर्वेद में किया गया है, और उनका उपयोग शरीर के कई रोगों से लड़ने में किया जाता है। पहले बात करते हैं नीम के पौधे या उसके पत्तों की। नीम का पौधा ऐसा पौधा है जिसकी टहनी, फल, छाल, और पत्ते सभी गुणों से भरपूर होते हैं, लेकिन आज हम सिर्फ पत्तों के बारे में बात करेंगे। नीम के पत्तों के सेवन से पेट में पनप रहे खराब बैक्टीरिया का नाश होता है और रक्त शुद्ध भी होता है। नीम के पत्तों का लेप या पानी में डालकर स्नान करने के भी बहुत सारे फायदे हैं। त्वचा से संबंधित रोगों में पत्तों का लेप लाभकारी साबित होता है। दूसरे नंबर पर है मदार का पौधा।
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मदार के पौधे को घर में लगा सकते हैं, लेकिन यह आमतौर पर आसानी से आस-पास उपलब्ध होता है। मदार के पत्ते गुणों से भरपूर होते हैं और सूजन से लेकर दर्द तक को कम करने का काम करते हैं। अगर जोड़ों में दर्द की समस्या है, तो मदार के पत्ते पर सरसों का तेल लगाकर हल्का सेंक लें और प्रभावित जगह पर लगाएं। पत्ते में दर्द को सोखने की क्षमता दवा से अधिक होती है। तीसरा और आखिरी पौधा है बेहया का पौधा। बेहया एक बारहमासी पौधा है, जिसे आराम से छत पर गमले में लगाया जा सकता है। इसके फूल से लेकर पत्ते तक गुणकारी होते हैं। बेहया के पत्ते का इस्तेमाल जोड़ों के दर्द, सूजन, और चर्म रोगों में प्रमुखता से किया जाता है। दाद और खुजली में बेहया के पत्ते का लेप प्रभावी तरीके से काम करता है, हालांकि इसके सेवन से बचना चाहिए।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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