कैराना में फाइलों में दबकर रह गए अवैध कालोनियों पर कार्रवाई के आदेश
कैराना। नगर के चारों ओर ग्कृषि भूमि पर हरे बाग काटकर अवैध कॉलोनियों का जाल बिछाया जा रहा है। इन पर रोक लगाने के लिए राजस्व विभाग के अफसर सख्त कार्यवाही के आदेश तो दे रहे हैं, लेकिन मैदानी अमला उनकी मंशा पर पानी फेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। मैदानी अमले की […]
कैराना। नगर के चारों ओर ग्कृषि भूमि पर हरे बाग काटकर अवैध कॉलोनियों का जाल बिछाया जा रहा है। इन पर रोक लगाने के लिए राजस्व विभाग के अफसर सख्त कार्यवाही के आदेश तो दे रहे हैं, लेकिन मैदानी अमला उनकी मंशा पर पानी फेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। मैदानी अमले की लापरवाही के कारण खेतों में प्लॉट काटे जा रहे हैं और उस पर न तो रोक लगाने का प्रयास किया जा रहा है और न ही प्रबंधन में लेने की कार्रवाई की जा रही है।
हद तो यह है अवैध कालोनियों की सूची तैयार होने के तीन माह बीत जाने के बाद भी भू -माफियाओं के खिलाफ राजस्व विभाग का अमला थाने में एफआइआर दर्ज नहीं करा पाया है। इससे अवैध कालोनियों का संचालन करने वालों के हौसले बुलंद हो रहे हैं। इस करोड़ों रुपये के काले कारोबार पर प्रभावी कार्रवाई नहीं न होने पर नगर एवं क्षेत्र में चर्चाएं आम है कि लगभग 80 कालोनियों की सूची तैयार कर ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।
ये भी पढ़ें सरकारी आश्वासन समिति की बैठक सम्पन्न, जिला अस्पताल व निकिता ग्रीनटेक प्लांट का किया निरीक्षणडीएम जसजीत कौर व एडीएम संतोष कुमार अवैध कालोनियों व भू -माफियाओं की निष्पक्ष तरीके से सूची तैयार कर कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए है। जनपद मुख्यालय पर तीन माह की समीक्षा बैठक में जनपद में अवैध कालोनियों व भूमाफियाओं के खिलाफ खूब प्रगति जानने व कार्रवाई के निर्दशों पर तहसील कैराना एवं नगर में कार्रवाई कर अवैध कालोनी ध्वस्त नहीं कराई गई है। इसी कारण अवैध कालोनियों की संख्या में बढोत्तरी हुई है।
एसडीएम के द्वारा कार्रवाई के लिए नोटिस जारी कर कार्रवाई के आदेश तो दे दिए गए, लेकिन कार्रवाई नहीं की गई। इसका लाभ उठाते हुए कॉलोनी काटने वाले भू-भूमाफिया बेखौफ है। इस लापरवाही का ही नतीजा है कि अवैध कॉलोनियों का जाल फैलता जा रहा है।
अवैध कालोनियों की सूची पर कार्रवाई शून्य
तहसील प्रशासन द्वारा हलका लेखपालों से सूची तैयार कराई गई थी। सूची में घालमेल होने पर यह मामला उच्चधिकारियों के संज्ञान में जाने के बाद पुनः सूची खसरा संख्या, रकबा, डीलरों के नाम व मोबाइल नम्बर सहित तैयार कराई गई। लेकिन तीन माह पूर्व तैयार की गई सूची पर कार्रवाई आज भी शून्य है और लगातार अवैध कालोनियों का दायरा कम होने की बजाए बढ़ता ही जा रहा है,जो प्रशासन की कार्रवाई की पोल खोलने के लिए काफी है।
कार्रवाई आदेशों तक सिमट कर रह गई
प्रशासन की कार्रवाई का मखौल उड़ाते हुए अवैध कालोनी संचालक सीना तानकर कार्रवाई को मजाक बता रहे हैं,क्योंकि नोटिस,अल्टीमेटम, सूची तैयारी के आदेश सब धरे रह गए,लेकिन कार्रवाई के लिए आज भी जनता आस लगाए बैठी है। सवाल यह उठता है कि कार्रवाई करेगा कौन? भूमाफियाओं को बचाने व तालमेल बिठाने के लिए उनके मसीहा लगातार इस मामले को लेकर सक्रिय हैं,जो किसी भी मुश्किल घड़ी में ढाल बनाकर खड़े रहने का आश्वासन देते हुए प्रॉपर्टी डीलरो इतिश्री कर रहे हैं। यही कारण है कि खुलेआम संचालक यह कहते सुनाई देते हैं कि इस तरह की कार्रवाई होती रहती है कुछ बिगड़ने वाला नही है।
कालोनी में हिस्सेदारी का खेल, कैसे हो कार्रवाई
अवैध कालोनी को काटने वाले डीलरों की जड़े बहुत गहरी है। जिस कारण वह छोटे कर्मचारी से बड़े अधिकारी तक निर्धारित धनराशि को पहुँचाते है। जिस कारण उच्चधिकारियों को बरगला कर इनके संरक्षक बनके ये स्थानीय अधिकारी कार्रवाई नहीं करने देते है। ऐसे लोगों की वजह से सरकार की दिनप्रतिदिन छवि भी लोगों की नजरों में खराब की जा रही है।
मुख्यमंत्री जांच कराकर करें कमर तोड़ कार्रवाई
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी
आदित्यनाथ प्रदेश को सर्व उत्तम बनाने की स्वयं की धारणा से एक कर्म योगी की भांति कार्य कर रहें है। लेकिन भृष्ट अधिकारी इस संकल्प को कमजोर कर रहें है। निष्पक्ष जांच कर छोटे कर्मचारी से लेकर शामिल सभी अधिकारियों व भूमाफियाओं के इस गठजोड़ पर ऐसी कार्रवाई की जाए,जो प्रदेश में एक नजीर बने।
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