अमरोहा में जहरीला पानी बना ‘साइलेंट किलर’, 68 दिनों से धरने पर डटे किसान
अमरोहा। जिले के गजरौला क्षेत्र में जल प्रदूषण का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। नाईपुरा गांव में दूषित पानी को लेकर ‘साइलेंट किलर’ जैसी स्थिति पैदा हो गई है। इस समस्या के विरोध में किसान पिछले 68 दिनों से लगातार धरना दे रहे हैं, जबकि प्रशासन अभी तक जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है।
ये भी पढ़ें फैमिली आईडी एवं अन्य योजनाओं में लापरवाही पर हस्तिनापुर व परीक्षितगढ़ बीडीओ को प्रतिकूल प्रविष्टि जांच समिति की अध्यक्षा एवं डिप्टी कलेक्टर श्रीमती चंद्रकांता ने बताया कि नमामि गंगे, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जल निगम और एनजीटी के विशेषज्ञों की संयुक्त टीम द्वारा लिए गए पानी के सैंपल की रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने बताया कि 20 फरवरी को टीम ने बगद नदी और गजरौला के नाईपुरा क्षेत्र में निरीक्षण कर पानी के नमूने लिए थे। जल निगम द्वारा दूषित पानी देने वाले हैंडपंपों को चिन्हित कर उन पर लाल निशान लगा दिए गए हैं।
दूसरी ओर, नाईपुरा गांव में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले दो महीनों से अधिक समय से पानी जहरीला हो चुका है। हैंडपंप और ट्यूबवेल से पीला और बदबूदार पानी निकल रहा है, जिससे लोगों को गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
धरने पर बैठे किसानों का आरोप है कि गजरौला औद्योगिक क्षेत्र की रासायनिक इकाइयों से निकलने वाला दूषित पानी बगद नदी और भूमिगत जल स्रोतों में मिल रहा है। इसके कारण कैंसर, त्वचा रोग और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही हैं। फसलें खराब हो रही हैं और दुधारू पशु भी प्रभावित हो रहे हैं। कई किसान अब गांव छोड़ने की सोचने लगे हैं।
भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले किसान राष्ट्रीय राजमार्ग-09 स्थित शहबाजपुर डोर पर अनिश्चितकालीन धरना दे रहे हैं, जो अब 68वें दिन में प्रवेश कर चुका है। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे भाकियू नेता नरेश चौधरी ने आरोप लगाया कि प्रशासन और संबंधित विभागों ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। उन्होंने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जल विभाग की लापरवाही के कारण स्थिति और गंभीर होती जा रही है।
उन्होंने राजनीतिक दलों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि किसानों की समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है और बिना आंदोलन के कोई सुनवाई नहीं होती। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो क्षेत्र के लोग पलायन करने को मजबूर हो जाएंगे।
धरना स्थल पर किसानों ने कई बार प्रदर्शन, पुतला दहन और ज्ञापन सौंपकर विरोध जताया, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हो सका है। क्षेत्र के सैकड़ों परिवार इस प्रदूषण से प्रभावित हैं, जिससे स्वास्थ्य संकट लगातार गहराता जा रहा है।
इस दौरान मुख्य सचिव अरुण सिद्धू, प्रदेशाध्यक्ष रामकृष्ण चौहान, राष्ट्रीय सचिव चंद्रपाल सिंह, मंडल अध्यक्ष अहसान अली, जिला अध्यक्ष राशिद समेत कई पदाधिकारी और किसान मौजूद रहे।
फिलहाल, सभी की नजर पानी के सैंपल की जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जिसके बाद प्रशासनिक कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक यह संकट और गंभीर होता जाएगा।
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लेखक के बारे में
अभिषेक भारद्वाज एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 11 वर्षों से मुरादाबाद मंडल की पत्रकारिता का व्यापक अनुभव है। वे मुरादाबाद के प्रतिष्ठित एसएस न्यूज़ चैनल में संपादकीय प्रभारी जैसे महत्वपूर्ण पद पर कार्य कर चुके हैं। मुरादाबाद की राजनीतिक, सामाजिक और स्थानीय खबरों पर उनकी गहरी पकड़ है। वर्तमान में वे रॉयल बुलेटिन के मुरादाबाद जिला प्रभारी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

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