उत्तर प्रदेश विधानसभा में उठा किन्नर समुदाय का मुद्दा, मंत्री असीम अरुण ने दिया जवाब
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा में गुरुवार को किन्नर समुदाय का मुद्दा उठा। समाजवादी पार्टी के विधायक सचिन यादव ने कहा कि किन्नर समाज के लोगों को शिक्षा, राशनकार्ड, स्वास्थ्य, नौकरी जैसी सुविधाएं नहीं मिलती हैं। सरकार ने ट्रांसजेंडर कल्याण आयोग बनाया लेकिन उसका अध्यक्ष, सचिव, उपाध्यक्ष पुरुष हैं। ऐसे में उन्हें न्याय नहीं मिल सकता।
प्रश्नकाल के दौरान उठे सवाल के जवाब में सरकार का पक्ष रखते हुए समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने कहा कि लोकतंत्र के इस मंदिर में इस प्रकार का पहला सवाल है। किन्नर समाज के बारे में जैसा सदस्य कह रहे हैं, ऐसा नहीं है। सरकार ने बहुत कुछ किया है। आगे भी करने वाली है।
उन्होंने बताया कि 2014 में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण बनाम भारत संघ जजमेंट से इसकी यात्रा शुरू हुई। मंत्री ने सरकार का पक्ष रखते हुए बताया कि थानों में अलग से एक सेल बनाई गई है। किन्नर समुदाय के साथी आज स्कूलों में, विश्वविद्यालयों में पढ़ाई कर रहे हैं। बहुत से ऐसे हैं जो अपने पहनावे से अलग दिख जाते हैं लेकिन बहुत से अलग नहीं हो पाते। वे सब में शामिल हैं। उनकी पहचान नहीं हो पाती। पहचान हो पाए, इसके लिए सभी किन्नरों के लिए पहचान पत्र (ट्रांसजेंडर कार्ड) बनाये गए हैं और बनाये जा रहे हैं। स्वास्थ्य के लिए आयुष्मान कार्ड उनके लिए भी हैं। सरकार ट्रांसजेंडर महोत्सव का आयोजन करती है। उसमें समाज से जुड़े विषय पर चर्चा, परिचर्चा, फिल्मों का प्रदर्शन किया जाता है। उनके लिए मंच मुहैया कराया जाता है। इस समाज को मुख्य धारा से जोड़ने के लिए सरकार कार्य कर रही है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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