मेरठ के कंकरखेड़ा में दबंगई: गाली-गलौज का विरोध करने पर मां-बेटी की सरेराह पिटाई, वीडियो वायरल होने पर जागा प्रशासन
मेरठ के थाना कंकरखेड़ा क्षेत्र के गांव घसौली में मानवता और सुरक्षा व्यवस्था को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ गाली-गलौज का विरोध करने पर दबंगों ने एक मां और उसकी बेटी को बीच सड़क पर बेरहमी से पीट दिया। चौंकाने वाली बात यह है कि घटना 17 फरवरी की है और पीड़ित परिवार पिछले कई दिनों से न्याय के लिए पुलिस चौकियों और आला अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काट रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस महकमे में हलचल मची है।
फैक्ट्री जाते समय रास्ते में रोका
जानकारी के अनुसार, घसौली निवासी रेनू अपनी बेटी के साथ 17 फरवरी को फैक्ट्री में काम करने जा रही थी। आरोप है कि रास्ते में गांव के ही रहने वाले अनिल, उसकी पत्नी सीमा, बेटों दीपांशु व सचिन और बेटी नीतू ने उन्हें रोक लिया। बिना किसी उकसावे के आरोपियों ने मां-बेटी के साथ गाली-गलौज शुरू कर दी। जब पीड़ित महिलाओं ने इसका कड़ा विरोध किया, तो दबंग परिवार ने लाठी-डंडों और जूतों से उन पर हमला बोल दिया।
पुलिस की मौजूदगी में पिटाई का आरोप
पीड़ित मां-बेटी का आरोप बेहद गंभीर है। उनका कहना है कि मारपीट की सूचना मिलने पर कंकरखेड़ा पुलिस मौके पर पहुंची थी, लेकिन पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में ही दबंगों ने उन्हें सड़क पर घसीट-घसीटकर पीटा। इसके बाद पीड़ित पक्ष शोभापुर पुलिस चौकी से लेकर कंकरखेड़ा थाने और एसएसपी दफ्तर तक गुहार लगाने पहुंचा, लेकिन हर जगह से उन्हें निराशा हाथ लगी। आरोप है कि दबंग परिवार के रसूख के चलते पुलिस मामले को दबाने में जुटी रही।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
रविवार को इस मारपीट का लाइव वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में साफ दिख रहा है कि किस तरह पुरुष और महिलाएं मिलकर मां-बेटी पर टूट पड़े हैं और उन्हें बचाने वाला कोई नहीं है। वीडियो वायरल होते ही पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे, जिसके बाद आनन-फानन में वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लिया।
अब एसएसपी कार्यालय से मिले निर्देशों के बाद स्थानीय पुलिस वीडियो के आधार पर आरोपियों की शिनाख्त कर उन पर कानूनी कार्रवाई की बात कह रही है। हालांकि, घटना के कई दिन बीत जाने के बाद भी गिरफ्तारी न होने से पीड़ित परिवार अब भी दहशत के साये में जीने को मजबूर है।
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