पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की मांग तेज: 22 जिलों की जनता 50 वर्षों से कर रही है आंदोलन
मेरठ। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की खण्डपीठ स्थापित करने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ रही है। इस संबंध में एक विस्तृत ज्ञापन के माध्यम से सरकार का ध्यान इस गंभीर विषय की ओर आकर्षित किया गया है। ज्ञापन में तर्क दिया गया है कि उत्तर प्रदेश, जो लगभग 25 करोड़ से अधिक जनसंख्या वाला देश का सबसे बड़ा राज्य है, वहां की न्याय व्यवस्था भौगोलिक दृष्टि से संतुलित नहीं है।
न्याय के लिए तय करनी पड़ती है 500 से 750 किमी की दूरी
दस्तावेज़ के अनुसार, वर्तमान में उच्च न्यायालय प्रदेश के पूर्वी सिरे पर इलाहाबाद में स्थित है, जिसकी केवल एक बेंच लखनऊ में है, जिसका कार्यक्षेत्र मात्र 13 जिलों तक सीमित है। इसके विपरीत, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के करीब 22 जिलों के वादकारियों को न्याय पाने के लिए 500 किमी से 750 किमी तक की लंबी दूरी तय कर इलाहाबाद पहुंचना पड़ता है। स्थिति यह है कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय में लंबित कुल मुकदमों का लगभग 52 प्रतिशत हिस्सा अकेले पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों से है।
अन्य राज्यों की तुलना में पिछड़ा क्षेत्र
ज्ञापन में विभिन्न राज्यों का तुलनात्मक विवरण देते हुए बताया गया है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जनसंख्या वर्तमान में लगभग 8 करोड़ है। तुलनात्मक रूप से:
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मध्य प्रदेश में 8.65 करोड़ की जनसंख्या पर मुख्य पीठ (जबलपुर) के अलावा इंदौर और ग्वालियर में दो खण्डपीठ हैं।
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राजस्थान (8.10 करोड़) और तमिलनाडु (7.68 करोड़) जैसे राज्यों में भी अपनी-अपनी खण्डपीठ स्थापित हैं, जबकि इनकी जनसंख्या पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बराबर या उससे कम है।
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महाराष्ट्र में नागपुर और औरंगाबाद के साथ अब कोल्हापुर खण्डपीठ भी घोषित की जा चुकी है।
50 वर्षों से जारी है संघर्ष
क्षेत्र की जनता पिछले 50 वर्षों से अधिक समय से हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर आंदोलनरत है। ज्ञापन में मांग की गई है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जनता को सस्ता, सुलभ और त्वरित न्याय प्रदान करने के लिए इलाहाबाद उच्च न्यायालय की एक खण्डपीठ का यहाँ स्थापित होना नितांत आवश्यक है।
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