सोनू के परिवार से मिलने जा रहे मंत्री नरेंद्र कश्यप को भी पुलिस ने रोका, परिजनों ने पुलिस पर लगाए आरोप, मंत्री ने दिलाया भरोसा
मेरठ/मुजफ्फरनगर। मुजफ्फरनगर के किला मोहल्ला निवासी सोनू कश्यप की मेरठ के ज्वालागढ़ में हुई नृशंस हत्या के बाद अब आक्रोश की चिंगारी भड़क उठी है। कपसाड़ कांड की तपिश अभी शांत भी नहीं हुई थी कि ज्वालागढ़ में हुई इस वारदात ने कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बुधवार को हालात इस कदर बेकाबू दिखे कि प्रशासन ने पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू कर बाहरी लोगों की एंट्री पर 26 जनवरी तक पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।
परिजनों का आरोप: "पुलिस ने दबाया सच, सीसीटीवी में दिखे 4 कातिल" मृतक सोनू के भाई और बहन ने पुलिसिया कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। परिजनों का साफ तौर पर कहना है कि पुलिस ने केवल एक आरोपी 'मोगली' को जेल भेजकर खानापूर्ति कर दी है, जबकि सीसीटीवी फुटेज में स्पष्ट रूप से 4 लोग दिखाई दे रहे हैं। परिजनों का आरोप है कि सोनू को ईंटों से पीटकर अधमरा करने के बाद जिंदा जलाया गया था। इस जनाक्रोश को देखते हुए मेरठ एसएसपी ने तत्काल प्रभाव से केस की विवेचना सरधना थाने से हटाकर क्राइम ब्रांच (अपराध शाखा) को सौंप दी है।
मंत्री ने अपनी जेब से दी 1 लाख की मदद, योगी सरकार का जताया भरोसा परिजनों का दुख साझा करते हुए मंत्री नरेन्द्र कश्यप ने मृतक सोनू के परिवार को अपनी ओर से एक लाख रुपये की निजी आर्थिक सहायता प्रदान की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार पीड़ित परिवार के साथ चट्टान की तरह खड़ी है। मंत्री ने कहा, "योगी सरकार 'जीरो टॉलरेंस' की नीति पर काम कर रही है। अपराधी चाहे कितना भी रसूखदार क्यों न हो, उसे पाताल से भी ढूंढकर सजा दी जाएगी।" उन्होंने परिवार को आश्वस्त किया कि शासन स्तर से मिलने वाली हर सरकारी सहायता और सुविधा उन्हें प्राथमिकता पर दिलाई जाएगी।
अधिकारियों को 'जीरो टॉलरेंस' की चेतावनी, निष्पक्ष जांच के निर्देश बॉर्डर पर ही मौजूद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को मंत्री ने सख्त लहजे में निर्देश दिए कि इस हत्याकांड की जांच पूरी तरह निष्पक्ष और त्वरित होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कानून के शासन में किसी भी कोताही की गुंजाइश नहीं है। मंत्री ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोग ऐसी दुखद घटनाओं पर राजनीति की रोटियां सेकने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि सरकार संवेदनशीलता के साथ ठोस कार्रवाई में विश्वास रखती है।
