पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान को भी पुलिस ने रोका, परिजनों को दादरी से गाड़ी में बैठाकर मुजफ्फरनगर लाए, गली में बैठकर सुनी पीड़ा
मुजफ्फरनगर/मेरठ। मेरठ के ज्वालागढ़ में हुई सोनू कश्यप की निर्मम हत्या के बाद अब मुजफ्फरनगर की गलियों में आक्रोश और राजनीति दोनों उबाल पर हैं। बुधवार को पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान ने पीड़ित परिवार से मिलने की कोशिश की, लेकिन प्रशासन ने उन्हें भी ज्वालागढ़ जाने से रोक दिया। पुलिसिया पाबंदियों के बीच डॉ. बालियान ने दादरी में सोनू की मां और बहन से मुलाकात की और फिर उन्हें अपनी गाड़ी में बैठाकर मुजफ्फरनगर के मोहल्ला किला पहुंचे। यहाँ भी पुलिस ने उन्हें घर के अंदर जाने से रोक दिया, जिसके बाद पूर्व मंत्री ने गली में ही शोकाकुल परिवार के साथ बैठकर उनका दर्द साझा किया।
स्थानीय पुलिस पर भरोसा नहीं, उच्च स्तरीय जांच की मांग डॉ. संजीव बालियान ने पुलिस प्रशासन के अड़ियल रवैये पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा, "मैं घर के अंदर नहीं जा सका क्योंकि पुलिस ने रोक दिया, इसलिए गली में ही परिवार से मिला ताकि न्याय की आवाज़ दबने न पाए।" बालियान ने दोटूक कहा कि स्थानीय पुलिस की अब तक की कार्रवाई संदिग्ध है और उन्हें इस पर बिल्कुल भरोसा नहीं है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा कि केवल एक आरोपी को जेल भेजना काफी नहीं है, सीसीटीवी में दिख रहे सभी हत्यारों को सजा मिलनी चाहिए।
सियासी अखाड़ा बना किला मोहल्ला, चंद्रशेखर और हरेंद्र मलिक भी पहुंचे सोनू कश्यप हत्याकांड अब पूरी तरह सियासी अखाड़े में तब्दील हो गया है। इससे पहले आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद और सपा सांसद हरेंद्र मलिक ने भी पीड़ित परिवार से मिलने का प्रयास किया। हालांकि पुलिस ने उन्हें भी रोकने की भरपूर कोशिश की, लेकिन हरेंद्र मलिक आखिरकार परिवार से मिल सके और मदद का आश्वासन दिया। फिलहाल, प्रशासन ने पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर रखा है और किसी भी बाहरी व्यक्ति की एंट्री पर कड़ा पहरा है।
