वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच बांग्लादेश सरकार का बड़ा फैसला, देशभर के विश्वविद्यालय किए बंद
ढाका। पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा संकट गहराया हुआ है। मौजूदा संकट को देखते हुए बांग्लादेश सरकार ने बिजली और ईंधन बचाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने पूरे देश में विश्वविद्यालयों को बंद करने का आदेश जारी किया है। शिक्षा मंत्रालय की ओर से जारी निर्देश के अनुसार, विश्वविद्यालयों में छुट्टियां पवित्र ईद-उल-फितर की छुट्टियों के अंत तक जारी रहेंगी, जैसा कि विश्वविद्यालयों के शैक्षणिक कैलेंडर में निर्धारित है। बांग्लादेश के बंगाली डेली अखबार प्रोथोम आलो के अनुसार, “वैश्विक संकट से निपटने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर बिजली और ऊर्जा की बचत करना आवश्यक है।
इसके लिए सभी सार्वजनिक और निजी विश्वविद्यालयों के अधिकारियों और कर्मचारियों को बिजली और ऊर्जा के उपयोग में जिम्मेदारी और दक्षता दिखानी होगी।” शिक्षा मंत्रालय ने बिजली और ईंधन बचाने के लिए 11 बिंदुओं वाले निर्देशों को लागू करने का भी आह्वान किया है। इनमें वाहनों के उपयोग को सीमित करना भी शामिल है। यह संकट पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध से पैदा हुआ है, जो 28 फरवरी से और बढ़ गया है। उस दिन संयुक्त अमेरिका-इजरायल हमलों में ईरान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया और सर्वोच्च नेता आयतोल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई। इसके जवाब में ईरान ने इजरायल, अमेरिकी हितों और उन कई खाड़ी देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने हैं।
बांग्लादेश के जाने-माने अखबार द डेली स्टार की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जैसे-जैसे वेस्ट एशिया में लड़ाई से ग्लोबल एनर्जी मार्केट में तनाव बना हुआ है, बांग्लादेश को इसके नतीजे महसूस होने लगे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, सप्ताह के अंत में ढाका, चट्टोग्राम और अन्य स्थानों के पेट्रोल पंपों पर ईंधन खरीदने के लिए लोगों की भीड़ लग गई। संभावित कमी के डर से वाहन चालक ईंधन भरवाने के लिए दौड़ पड़े। द डेली स्टार के एडिटोरियल में कहा गया, “कई पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग गईं, जहां चालक अपने टैंक भरवाने के लिए घंटों इंतजार कर रहे थे।
देश ऊर्जा आयात पर काफी निर्भर है, खासकर मध्य पूर्व से आने वाले फ्यूल ऑयल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) पर। हॉर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से परिवहन, उद्योग और घरों के लिए आपूर्ति में बाधा की चिंता बढ़ गई है।” इसमें आगे कहा गया, "हमारे कच्चे तेल के इंपोर्ट का लगभग पांचवां हिस्सा इसी जरूरी रास्ते से गुजरता है। हालांकि, ज्यादातर रिफाइंड पेट्रोलियम प्रोडक्ट दूसरे एशियाई सप्लायर से लिए जाते हैं, लेकिन ग्लोबल एनर्जी फ्लो में अनिश्चितता ने कंज्यूमर की चिंता बढ़ा दी है।"
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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