फिरोजाबाद में सरकारी आवास में मिला जिला जज के अर्दली का शव, एक वर्ष पहले हुई थी शादी
फिरोजाबाद। जिले में जिला जज के अर्दली का शव सरकारी आवास में फंदे पर लटका मिलने से सनसनी फैल गई है। उसकी पत्नी शादी समारोह से लौटी तो कमरे में शव लटका देखा। तो पत्नी के होश उड़ गए। आनन-फानन में इसकी सूचना पुलिस को दी गई। अर्दली के सुसाइड की जानकारी मिलने पर न्यायिक […]
फिरोजाबाद। जिले में जिला जज के अर्दली का शव सरकारी आवास में फंदे पर लटका मिलने से सनसनी फैल गई है। उसकी पत्नी शादी समारोह से लौटी तो कमरे में शव लटका देखा। तो पत्नी के होश उड़ गए। आनन-फानन में इसकी सूचना पुलिस को दी गई।
अर्दली के सुसाइड की जानकारी मिलने पर न्यायिक अधिकारी के साथ-साथ प्रशासनिक व पुलिस प्रशासन मौके पर पहुंचा। फिलहाल पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिये भेज दिया है।
दरअसल मामला थाना मटसेना क्षेत्र का है। जहां जनपद जौनपुर निवासी निखिल अस्थाना जिला जज के यहां पर अर्दली के पद पर तैनात था। वह पत्नी अर्चना के साथ जिला मुख्यालय स्थित सरकारी आवास में रहता था। निखिल की शादी एक वर्ष पहले अर्चना के साथ हुई थी। दोनों के बच्चे नहीं थे।
बताया जाता है कि निखिल की बहन के देवर की शादी में शामिल होने के लिए अर्चना 14 फरवरी को कानपुर गई थी। पत्नी कानपुर से लौटी तो सरकारी आवास का दरवाजा नहीं खुला।
ये भी पढ़ें बेटी की शादी से पहले गैस के लिए तरसता पिता! दिनभर लाइन में खड़ा रहा, फिर भी नहीं मिला सिलेंडरपत्नी ने कई बार आवाज लगाई लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। लोगों ने काफी प्रयासों के बाद जब दरवाजा खोला तो सामने निखिल का शव फंदे पर दुपट्टे के सहारे लटका मिला।
पति के शव को फंदे पर लटका देख पत्नी बेसुध हो गई। न्यायिक अधिकारियों के साथ पुलिस प्रशासनिक अफसर एवं मटसेना थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने लोगों की मदद से शव को नीचे उतरवाया।
रॉयल बुलेटिन से जुड़ें:
देश-प्रदेश की ताज़ा ख़बरों को सबसे पहले पढ़ने के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल को फॉलो करें:
आपको यह खबर कैसी लगी? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में ज़रूर दे। आपकी राय रॉयल बुलेटिन को और बेहतर बनाने में बहुत उपयोगी होगी।
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
रॉयल बुलेटिन के संस्थापक एवं मुख्य संपादक अनिल रॉयल ने वर्ष 1985 में मात्र 17 वर्ष की आयु से मुज़फ्फरनगर की पावन भूमि से निर्भीक और जनपक्षधर पत्रकारिता का संकल्प लिया। बीते लगभग चार दशकों से वे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सशक्त और विश्वसनीय आवाज़ के रूप में पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं।
पत्रकारिता के अपने लंबे अनुभव के आधार पर उन्होंने वर्ष 2010 में नोएडा से रॉयल बुलेटिन के प्रिंट संस्करण का सफल विस्तार किया। समय के साथ बदलते मीडिया परिदृश्य को समझते हुए, उनके नेतृत्व में यह संस्थान आज एक मजबूत और प्रभावशाली डिजिटल समाचार मंच के रूप में स्थापित हो चुका है।
वर्तमान में रॉयल बुलेटिन की पहुँच न्यूज़ पोर्टल, फेसबुक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप सहित सभी प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर करोड़ों पाठकों तक है। प्रिंट और डिजिटल मीडिया के स्वामी एवं संपादक के रूप में अनुभव, सत्यनिष्ठा और जन-सरोकार उनकी पत्रकारिता की मूल आधारशिला रहे हैं।

टिप्पणियां