केवी और नवोदय विद्यालयों में 13000+ शिक्षकों के पद खाली; शिक्षा मंत्रालय का बड़ा खुलासा

नई दिल्ली। देशभर के केंद्रीय विद्यालयों (केवी) और जवाहर नवोदय विद्यालयों (जेएनवी) में 13,701 शिक्षकों के पद खाली हैं।शिक्षा मंत्रालय ने सोमवार को लोकसभा में यह जानकारी दी। केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने एक लिखित प्रश्न के उत्तर में बताया कि केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) और नवोदय विद्यालय समिति (एनवीएस) से प्राप्त जानकारी के अनुसार, केवीएस में 8,618 और एनवीएस में 5,083 शिक्षकों के पद रिक्त हैं।
उन्होंने बताया कि नए केंद्रीय और नवोदय विद्यालयों के खुलने, कर्मचारियों के सेवानिवृत्त होने, इस्तीफे, पदोन्नति, तबादले और अन्य विभागों में प्रतिनियुक्ति पर जाने और स्कूलों के अपग्रेड होने की वजह से समय-समय पर रिक्तियां उत्पन्न होती रहती हैं। खाली पदों को भरना एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया है और केवीएस और एनवीएस के संबंधित भर्ती नियमों के प्रावधानों के अनुसार इन पदों को भरने की कोशिश की जाती है।
ये भी पढ़ें मुज़फ्फरनगर में गैस एजेंसी पर उपभोक्ताओं का भारी बवाल, 900 का सिलेंडर 2000 में बेचने का आरोपमंत्री ने बताया कि केवीएस और एनवीएस द्वारा कुछ समय के लिए अनुबंध के आधार पर भी टीचर रखे जाते हैं, ताकि पढ़ाई-लिखाई की प्रक्रिया में कोई रुकावट न आए। रेगुलर टीचरों की भर्ती जल्द से जल्द करने की कोशिश की जाती है, ताकि छात्रों के हितों को कोई नुकसान न पहुंचे। पिछले कुछ सालों में केवी और एनवी द्वारा लगातार हासिल किए गए ऊंचे रिज़ल्ट साफ़ तौर पर दिखाते हैं कि पढ़ाई के स्तर और छात्रों के प्रदर्शन को ठीक से बनाए रखा गया है और उनके साथ कोई समझौता नहीं किया गया है।
ये भी पढ़ें मुजफ्फरनगर: पुलिस भर्ती के नाम पर 3 करोड़ की ठगी का ऑडियो वायरल, ठग ताहिर उर्फ काला ने कबूला गुनाहउन्होंने बताया कि नवंबर 2025 में प्रत्यक्ष भर्ती के लिए केवीएस ने 8,714 और एनवीएस ने 5,045 शिक्षकों के पदों के लिए अधिसूचना जारी की थी। मंत्री ने यह भी बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में केंद्रीय विद्यालय संगठन को वेतन, सामान्य व्यय और पूंजीगत परिसंपत्तियों के सृजन के लिए अनुदान के रूप में 9,503.84 करोड़ रुपये की बजटीय सहायता प्रदान की गई है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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