नई दिल्ली: पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया संकट पर देश को चेताया; बोले- 'कोविड की तरह रहें तैयार, लंबे समय तक दिखेगा असर'

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को लोकसभा में पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी भीषण युद्ध पर अपना अब तक का सबसे बड़ा और स्पष्ट बयान दिया है। करीब 25 मिनट के अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने देशवासियों को अलर्ट करते हुए कहा कि इस जंग के आर्थिक और कूटनीतिक दुष्प्रभाव लंबे समय तक महसूस किए जाएंगे। उन्होंने देश से अपील की कि जिस प्रकार हमने एकजुट होकर 'कोविड महामारी' का सामना किया था, ठीक उसी तरह हमें इस आगामी वैश्विक संकट के लिए भी तैयार रहना होगा।
"कोविड जैसे संकट के लिए तैयार रहें" प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में विशेष रूप से जोर देते हुए कहा, "पश्चिम एशिया के हालात चिंताजनक हैं। यह युद्ध न केवल मानवता के लिए संकट है, बल्कि इसने भारत के सामने नई आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा की चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। इसके प्रभाव लंबे समय तक रहेंगे, इसलिए हमें धैर्य और एकजुटता के साथ तैयार रहना होगा।" उन्होंने राज्यों को भी निर्देश दिए कि वे जमाखोरी और कालाबाजारी करने वालों पर सख्त नजर रखें।
पीएम मोदी के संबोधन की 5 बड़ी बातें:
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होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर चिंता: पीएम ने साफ किया कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों को रोकना या कमर्शियल जहाजों पर हमला करना भारत को कतई मंजूर नहीं है। उन्होंने कहा कि यह मार्ग भारत की ऊर्जा आपूर्ति के लिए 'लाइफलाइन' है और इसकी सुरक्षा के लिए भारत हर संभव कूटनीतिक प्रयास कर रहा है।
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ऊर्जा सुरक्षा के लिए बदला गेमप्लान: प्रधानमंत्री ने जानकारी दी कि सरकार ने तेल और गैस के लिए अपनी निर्भरता को फैलाया है। पहले भारत 27 देशों से ऊर्जा आयात करता था, जो अब बढ़कर 41 देश हो गए हैं। इसके अलावा, भारत के पास 53 लाख मीट्रिक टन का 'स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व' भी मौजूद है।
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1 करोड़ भारतीयों की सुरक्षा: खाड़ी देशों में रहने वाले करीब 1 करोड़ भारतीयों की सुरक्षा को पीएम ने सर्वोच्च प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा कि अब तक 3.75 लाख भारतीय सुरक्षित लौट चुके हैं, जिनमें ईरान से आए 1,000 लोग (700 मेडिकल छात्र) शामिल हैं।
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किसानों और अन्न भंडार पर भरोसा: पीएम ने आश्वस्त किया कि युद्ध के बावजूद देश के अन्न भंडार भरे हुए हैं और फर्टिलाइजर (खाद) का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। सरकार किसानों पर इस वैश्विक संकट का बोझ नहीं पड़ने देगी।
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CBSE परीक्षाओं पर फैसला: खाड़ी देशों में बिगड़ते हालात को देखते हुए वहां के स्कूलों के लिए CBSE की 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं रद्द कर दी गई हैं, ताकि छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
कूटनीति पर भारत का रुख साफ प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने पश्चिम एशिया के लगभग सभी प्रमुख देशों के राष्ट्राध्यक्षों से दो दौर की बातचीत की है। भारत का रुख स्पष्ट है—नागरिकों और पावर प्लांट पर हमले स्वीकार्य नहीं हैं। भारत शांतिपूर्ण समाधान और संवाद का पक्षधर है और तनाव कम करने के लिए लगातार सक्रिय है।
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