RBI का सख्त आदेश: बैंक ऐप्स से अब हटेंगे गुप्त शुल्क..बैंकों को दिए पारदर्शिता के निर्देश..जानें कैसे सुरक्षित होगा आपका पैसा
जानें कैसे बैंक आपको गुमराह करते हैं और नए नियमों से आपको क्या फायदा होगा।
नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने ग्राहकों के हितों की रक्षा के लिए एक और क्रांतिकारी कदम उठाया है। अब बैंक अपने ऐप्स और वेबसाइट्स पर 'हिडन चार्जेस' (Hidden Charges) या जटिल शर्तों के जरिए ग्राहकों को गुमराह नहीं कर पाएंगे। RBI ने सभी बैंकों और वित्तीय संस्थानों को अपने डिजिटल इंटरफेस से "डार्क पैटर्न्स" (Dark Patterns) हटाने का सख्त आदेश दिया है।
RBI के नए आदेश
पारदर्शिता अनिवार्य
बैंकों को अब लोन, इंश्योरेंस या किसी भी सर्विस के शुल्क को ऐप के फ्रंट पेज पर स्पष्ट रूप से दिखाना होगा। 'Terms & Conditions' के पीछे चार्जेस को छिपाना अब दंडनीय होगा।
डार्क पैटर्न्स पर रोक
कई ऐप्स ग्राहकों को जबरन किसी सर्विस के लिए 'Opt-in' करा लेते हैं या 'Cancel' बटन को छोटा रखते हैं। RBI ने ऐसी सभी ट्रिक्स को तुरंत बंद करने को कहा है।
हिडन प्री-पेमेंट पेनल्टी
लोन की प्री-पेमेंट या फोरक्लोजर पर लगने वाले शुल्कों को लेकर अब बैंक पहले से ही स्पष्ट अलर्ट देंगे।
सब्सक्रिप्शन ट्रैप
ग्राहकों की सहमति के बिना किसी भी पेड सर्विस का ऑटो-रिन्यूअल करना अब संभव नहीं होगा।
क्या है RBI का नया आदेश?
RBI ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों को निर्देश दिया है कि वे अपनी डिजिटल सेवाओं को 1 जुलाई 2026 तक पूरी तरह से 'डार्क पैटर्न' मुक्त कर दें। इस नियम का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ग्राहक बिना किसी दबाव या धोखे के अपनी वित्तीय पसंद चुन सकें। अब किसी भी नई सर्विस (जैसे बीमा या अतिरिक्त कार्ड) को एक्टिवेट करने के लिए बैंक को ग्राहक की लिखित या डिजिटल सहमति लेनी होगी। बैंक अब जबरन एक सर्विस के साथ दूसरी सर्विस (जैसे लोन के साथ बीमा) नहीं बेच पाएंगे।
यदि यह साबित हो जाता है कि बैंक ने गलत तरीके से (Mis-selling) कोई उत्पाद बेचा है, तो बैंक को ग्राहक का पूरा पैसा वापस करना होगा और हर्जाना भी देना होगा।
डार्क पैटर्न्स: जिनसे आपको बचना है
बैंक अक्सर अपनी ऐप्स में ऐसी डिजाइन ट्रिक्स का इस्तेमाल करते हैं जिनसे ग्राहक अनजाने में पैसे खर्च कर देता है। इन्हें ही 'डार्क पैटर्न्स' कहा जाता है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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