जमीयत के सदर ने संघ प्रमुख मोहन भागवत को दी दावत, कहा- सनातन धर्म के साथ कोई विरोध नहीं !

नई दिल्ली। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना असअद मदनी ने यहां के रामलीला मैदान में जमीयत के महाअधिवेशन में शनिवार को अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा, “हम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के चीफ मोहन भागवत जी और उनके अनुयायियों को सादर आमंत्रित करते हैं। आइए, आपसी भेदभाव, द्वेष और अहंकार को भूलकर एक-दूसरे से हाथ मिलाएं […]
नई दिल्ली। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना असअद मदनी ने यहां के रामलीला मैदान में जमीयत के महाअधिवेशन में शनिवार को अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा, “हम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के चीफ मोहन भागवत जी और उनके अनुयायियों को सादर आमंत्रित करते हैं।
आइए, आपसी भेदभाव, द्वेष और अहंकार को भूलकर एक-दूसरे से हाथ मिलाएं और अपने प्यारे देश को दुनिया का सबसे विकसित, आदर्श और सुपर पावर और शांतिपूर्ण देश बनाएं।”
आगे असअद मदनी ने कहा, “सभी मसलों का समाधान बैठकर और चर्चा करके किया जा सकता है। आपसी घृणा के अंधेरे वातावरण में जो लोग भी आपसी संबंधों को बेहतर बनाने के लिए संवाद और एक-दूसरे के विचारों को समझने के लिए प्रयासरत हैं, हम उन सभी का स्वागत करते हैं और ऐसी सभी कोशिशों का समर्थन करते हैं।
उन्होंने कहा हमारा सनातन धर्म के साथ कोई विरोध नहीं है। इसी तरह आपको भी इस्लाम से आपत्ति नहीं होनी चाहिए।”
उन्होंने कहा, “यह मुल्क हमारा है, लेकिन हमारी इस बात को गलत ढंग से पेश किया जाता है।” मदनी ने कहा कि देश में यदि कोई घटना होती है, तो उसे पूरे समाज या देश का आईना नहीं बताया जाना चाहिए। देश में मुसलमानों और इस्लाम के खिलाफ नफरत फैलाई जा रही है। नफरत की कोई घटना होती है, तो सरकार और प्रशासन उस पर कोई कार्यवाही नहीं करता, जो उसे करना चाहिए। बल्कि वह खामोश रहता है। उन्होंने मुसलमानों से भी अपील की कि वे पूरे मुल्क और बहुसंख्यक समुदाय के बारे में उस नजरिए से ना सोचें, जैसा कुछ नफरती लोग सोचते हैं।
रॉयल बुलेटिन से जुड़ें:
देश-प्रदेश की ताज़ा ख़बरों को सबसे पहले पढ़ने के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल को फॉलो करें:
आपको यह खबर कैसी लगी? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में ज़रूर दे। आपकी राय रॉयल बुलेटिन को और बेहतर बनाने में बहुत उपयोगी होगी।
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
रॉयल बुलेटिन के संस्थापक एवं मुख्य संपादक अनिल रॉयल ने वर्ष 1985 में मात्र 17 वर्ष की आयु से मुज़फ्फरनगर की पावन भूमि से निर्भीक और जनपक्षधर पत्रकारिता का संकल्प लिया। बीते लगभग चार दशकों से वे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सशक्त और विश्वसनीय आवाज़ के रूप में पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं।
पत्रकारिता के अपने लंबे अनुभव के आधार पर उन्होंने वर्ष 2010 में नोएडा से रॉयल बुलेटिन के प्रिंट संस्करण का सफल विस्तार किया। समय के साथ बदलते मीडिया परिदृश्य को समझते हुए, उनके नेतृत्व में यह संस्थान आज एक मजबूत और प्रभावशाली डिजिटल समाचार मंच के रूप में स्थापित हो चुका है।
वर्तमान में रॉयल बुलेटिन की पहुँच न्यूज़ पोर्टल, फेसबुक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप सहित सभी प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर करोड़ों पाठकों तक है। प्रिंट और डिजिटल मीडिया के स्वामी एवं संपादक के रूप में अनुभव, सत्यनिष्ठा और जन-सरोकार उनकी पत्रकारिता की मूल आधारशिला रहे हैं।

टिप्पणियां