पंकज मलिक-अनिल कुमार विवाद में पूर्व मंत्री उमा किरण के बेटे की एंट्री, बोले- दलितों के नेता नहीं है मंत्री अनिल

मुजफ्फरनगर। समाजवादी पार्टी के विधायक पंकज मलिक और कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार के बीच छिड़ी सियासी जंग अब और तेज हो गई है। इस विवाद में पूर्व मंत्री उमा किरण के पुत्र और अधिवक्ता विक्रांत सिंह ने भी छलांग लगा दी है। विक्रांत सिंह ने कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वे इस पूरे प्रकरण को जबरदस्ती जातीय रंग देने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि यह पूरी तरह से उनकी कार्यशैली और बयानों से जुड़ा विवाद है।
निजी हितों के लिए दलित कार्ड खेलने का आरोप
एडवोकेट विक्रांत सिंह ने कहा कि विधायक पंकज मलिक ने एक कैबिनेट मंत्री से सवाल किया था, न कि किसी दलित के बेटे से। उन्होंने आरोप लगाया कि जब मंत्री ने समाजवादी पार्टी को 'गुंडों की पार्टी' कहा और उस पर पलटवार हुआ, तो बचाव में उन्होंने जातिवाद का सहारा लेना शुरू कर दिया। विक्रांत सिंह के अनुसार, यह मंत्री का अपना निजी हित हो सकता है, लेकिन इसमें दलित समाज का कोई हित नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पंकज मलिक सर्वसमाज के नेता हैं और उनकी छवि को धूमिल करने की कोशिश की जा रही है।
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प्रेस वार्ता के दौरान विक्रांत सिंह ने वर्ष 2015 के जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव का जिक्र करते हुए गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उस समय बसपा विधायक रहते हुए अनिल कुमार ने उन्हें (विक्रांत को) हराने के लिए बसपा के छह जिला पंचायत सदस्यों के वोट भाजपा के पक्ष में डलवाए थे। उन्होंने सवाल उठाया कि जो व्यक्ति अपने ही समाज के प्रत्याशी को हराने की साजिश रचता हो, वह दलितों का हितैषी कैसे हो सकता है।
मान्यवर कांशीराम और विकास कार्यों पर सवाल
कांशीराम के सम्मान के मुद्दे पर बोलते हुए विक्रांत सिंह ने कहा कि जिस सत्ताधारी दल में अनिल कुमार आज शामिल हैं, वहां के बैनर-पोस्टरों से मान्यवर कांशीराम की तस्वीरें गायब हैं। उन्होंने मांग की कि यदि मंत्री वास्तव में कांशीराम का सम्मान करते हैं, तो उन्हें भारत रत्न दिलाने की पहल करें। साथ ही, उन्होंने मंत्री के विकास दावों की हवा निकालते हुए कहा कि तीन बार विधायक और अब मंत्री रहने के बावजूद वे पुरकाजी को तहसील का दर्जा दिलाने और सोनाली नदी पर बांध निर्माण जैसे बुनियादी काम नहीं करा सके हैं।
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