मुजफ्फरनगर: गरीबी के खिलाफ जंग में बड़ी जीत, बंधन कोननगर और बजाज फाइनेंस की पहल से 3,000 परिवार हुए आत्मनिर्भर

मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश में समावेशी विकास और गरीबी उन्मूलन की दिशा में जनपद मुजफ्फरनगर ने एक प्रेरणादायक मिसाल पेश की है। सामाजिक संगठन बंधन कोननगर और बजाज फाइनेंस लिमिटेड के संयुक्त तत्वावधान में संचालित विशेष अभियान के चलते जिले के पांच ब्लॉकों के 3,000 परिवार सफलतापूर्वक गरीबी रेखा से बाहर निकल आए हैं। इस उपलब्धि ने प्रदेश सरकार के 'शून्य गरीबी' लक्ष्य को धरातल पर उतारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
आत्मनिर्भरता का जश्न और दीक्षांत समारोह
बंधन कोननगर द्वारा संचालित 'अत्यंत गरीब लक्षित' (टीएचपी) कार्यक्रम के समापन पर एक भव्य दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में लगभग 200 लाभार्थी परिवारों ने शिरकत की, जो अब अपने पैरों पर खड़े होकर समाज की मुख्यधारा से जुड़ चुके हैं। यह समारोह केवल एक आयोजन मात्र नहीं था, बल्कि उन हजारों परिवारों के संघर्ष और सफलता की कहानी का गवाह बना जिन्होंने अभावों को पीछे छोड़कर स्वावलंबन का मार्ग चुना है।
देश के 16 राज्यों में फैला है सेवा का नेटवर्क
वर्ष 2006 से कार्यरत कोलकाता स्थित सामाजिक संगठन बंधन कोननगर विभिन्न सरकारी और कॉर्पोरेट सीएसआर सहयोग से इस मानवीय मिशन को आगे बढ़ा रहा है। फरवरी 2026 तक प्राप्त आंकड़ों के अनुसार यह पहल देश के 16 राज्यों के चार लाख से अधिक परिवारों तक पहुंच चुकी है। इसमें दो लाख से ज्यादा परिवारों को सीधे तौर पर लाभांवित किया गया है, जबकि अन्य को तकनीकी सहयोग के माध्यम से सशक्त बनाया गया है। मुजफ्फरनगर में बजाज फाइनेंस के सीएसआर फंड के सहयोग से इस मिशन ने ग्रामीण आजीविका मिशन के साथ मिलकर काम किया।
सम्मान के साथ जीने का मिला अवसर
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि नगर पालिका अध्यक्ष मीनाक्षी स्वरूप ने लाभार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि यह पहल आर्थिक सहायता से कहीं बढ़कर है। यह समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को सम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर प्रदान करती है। उन्होंने मुजफ्फरनगर के 3,000 परिवारों के स्वावलंबी बनने को पूरे प्रदेश के लिए एक अनुकरणीय मॉडल बताया। लाभार्थियों को न केवल वित्तीय सहायता दी गई, बल्कि उन्हें अधिकार पहचान, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और स्थायी आजीविका के साधनों से भी जोड़ा गया।
आत्मनिर्भर भारत के सपने को मिली मजबूती
कार्यक्रम के दौरान मौजूद लाभार्थियों के चेहरों पर झलकता आत्मविश्वास इस बात का प्रमाण था कि सही मार्गदर्शन और संसाधनों की उपलब्धता से बड़े बदलाव संभव हैं। यह पहल अब जिले में गरीबी उन्मूलन के साथ-साथ आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक मजबूत आधार स्तंभ बन चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मॉडल्स से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और पलायन जैसी समस्याओं पर भी लगाम लगेगी।
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