कौन हैं हरमीत कौर ढिल्लों? व्हाइट हाउस में डोनाल्ड ट्रंप ने क्यों की चंडीगढ़ में जन्मी इस महिला नेता की तारीफ
भारतीय मूल की अमेरिकी वकील और रिपब्लिकन पार्टी की फायरब्रांड नेता हरमीत कौर ढिल्लों (Harmeet Kaur Dhillon) एक बार फिर वैश्विक चर्चा का केंद्र बन गई हैं। हाल ही में व्हाइट हाउस में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उनकी प्रतिभा और वफादारी की जमकर सराहना की। ट्रंप ने उन्हें "अविश्वसनीय वकील" और "देशभक्त" बताते हुए उनके काम की तारीफ की।
आइए विस्तार से जानते हैं कि हरमीत कौर ढिल्लों कौन हैं और अमेरिकी राजनीति में उनका कद इतना बड़ा क्यों है।
हरमीत कौर ढिल्लों: चंडीगढ़ से व्हाइट हाउस तक का सफर
हरमीत कौर ढिल्लों का जन्म 1969 में भारत के चंडीगढ़ में हुआ था। उनके पिता एक ऑर्थोपेडिक सर्जन थे। उनका परिवार बाद में अमेरिका जाकर बस गया।
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शिक्षा: उन्होंने डार्टमाउथ कॉलेज से स्नातक और वर्जीनिया स्कूल ऑफ लॉ से कानून की डिग्री हासिल की।
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सिख पहचान: हरमीत अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक जड़ों से गहराई से जुड़ी हुई हैं। 2024 के रिपब्लिकन नेशनल कन्वेंशन (RNC) में उन्होंने मंच से सिख अरदास (प्रार्थना) की थी, जिसका वीडियो पूरी दुनिया में वायरल हुआ था।
ट्रंप की 'लीगल वॉरियर' के रूप में पहचान
हरमीत कौर ढिल्लों को ट्रंप के सबसे भरोसेमंद कानूनी सलाहकारों में गिना जाता है। उनकी चर्चा के पीछे कुछ प्रमुख कारण है।
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कठिन समय में साथ: जब ट्रंप कई कानूनी लड़ाइयों और महाभियोग की प्रक्रियाओं का सामना कर रहे थे, तब हरमीत ने अदालतों में उनका पक्ष मजबूती से रखा।
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फ्री स्पीच की पैरोकार: उन्होंने सिलिकॉन वैली की बड़ी टेक कंपनियों (जैसे गूगल और फेसबुक) के खिलाफ अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर कई बड़े मुकदमे लड़े हैं।
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नागरिक अधिकार: 9/11 हमलों के बाद जब अमेरिका में सिखों को निशाना बनाया गया, तब उन्होंने उनके अधिकारों के लिए कानूनी लड़ाई लड़ी।
व्हाइट हाउस इवेंट में ट्रंप की तारीफ के मायने
व्हाइट हाउस के इवेंट में ट्रंप ने जिस तरह से हरमीत का नाम लिया, उसके कई राजनीतिक संकेत निकाले जा रहे हैं:
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बड़ी जिम्मेदारी का संकेत: राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि ट्रंप अपने दूसरे कार्यकाल में हरमीत को न्याय विभाग (Department of Justice) में कोई बड़ा पद या संभवतः फेडरल जज के रूप में नियुक्त कर सकते हैं।
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भारतीय प्रवासियों पर पकड़: हरमीत के जरिए ट्रंप भारतीय-अमेरिकी समुदाय (Indian Diaspora) को यह संदेश देना चाहते हैं कि उनके प्रशासन में भारतीयों का सम्मान और भागीदारी सर्वोपरि है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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