गाजियाबाद में बड़े जासूसी नेटवर्क का भंडाफोड़: विदेशी आकाओं के इशारे पर हो रही थी संवेदनशील ठिकानों की निगरानी, 9 और गिरफ्तार

गाजियाबाद। दिल्ली से सटे गाजियाबाद के कौशांबी थाना क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस ने एक अंतरराष्ट्रीय जासूसी सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। विदेशी नंबरों के माध्यम से देश के महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों और सुरक्षा बलों के ठिकानों की गोपनीय जानकारी साझा करने वाले इस गिरोह के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने अब 9 और आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिससे इस मामले में कुल गिरफ्तारियों की संख्या बढ़ गई है।
इस पूरे प्रकरण की शुरुआत 14 मार्च को हुई थी, जब पुलिस को सूचना मिली थी कि कुछ संदिग्ध लोग रेलवे स्टेशनों और सुरक्षा ठिकानों की तस्वीरें व वीडियो विदेशी नंबरों पर भेज रहे हैं। प्रारंभिक जांच के बाद पुलिस ने 6 आरोपियों को दबोचा था और उनके खिलाफ 'ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट' (शासकीय गुप्त बात अधिनियम) तथा 'भारतीय न्याय संहिता' की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए शासन के निर्देश पर एसआईटी का गठन किया गया था।
एसआईटी की पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जांच में कुल 11 नए नाम प्रकाश में आए, जिनमें से 9 को पुलिस ने अलग-अलग स्थानों से गिरफ्तार कर लिया है। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्हें विदेशी नंबरों से सीधे निर्देश और टास्क दिए जाते थे। जासूसी के इस आधुनिक तरीके में आरोपियों ने संवेदनशील स्थानों पर सौर ऊर्जा (सोलर पावर) से चलने वाले सिम-आधारित स्टैंड-अलोन सीसीटीवी कैमरे लगा रखे थे। इन कैमरों के जरिए विदेशी आका सीधे महत्वपूर्ण ठिकानों की लाइव फीड देख रहे थे।
ये भी पढ़ें नोएडा में क्राइम ब्रांच व सीबीआई जांच में डिजिटल अरेस्ट कर ठगी करने वाले दो साइबर ठग गिरफ्तारपुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर दो महत्वपूर्ण स्थानों से जासूसी के लिए इस्तेमाल किए जा रहे आधुनिक कैमरे बरामद कर लिए हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि इस काम के बदले आरोपियों को मोटी रकम का भुगतान किया जा रहा था। पुलिस अब इन पैसों के लेन-देन के स्रोतों और बैंक खातों की पड़ताल कर रही है।
फिलहाल गिरफ्तार किए गए सभी आरोपियों से गहन पूछताछ जारी है ताकि इस नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचा जा सके। पुलिस सूत्रों का कहना है कि इस मामले में अभी कुछ और गिरफ्तारियां संभव हैं और फरार चल रहे अन्य आरोपियों की तलाश में छापेमारी की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां इस बात की भी जांच कर रही हैं कि अब तक कितनी संवेदनशील जानकारी सीमा पार भेजी जा चुकी है।
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