गाजियाबाद: 27 लाख के चोरी के सरिए के साथ अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश, वजन घटाने के लिए इस्तेमाल करते थे रिमोट वाली चिप
गाजियाबाद। गाजियाबाद पुलिस ने शहर में लंबे समय से सक्रिय और निर्माण साइटों की नाक में दम करने वाले सरिया चोर गिरोह के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। स्वाट टीम, अपराध शाखा और थाना वेव सिटी पुलिस की संयुक्त टीम ने घेराबंदी करते हुए इस संगठित गिरोह के चार सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इनके पास से करीब 44 हजार 550 किलोग्राम चोरी का सरिया बरामद किया है, जिसकी बाजार में कीमत लगभग 27 लाख रुपये आंकी जा रही है।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से सरिया ले जाने के लिए इस्तेमाल होने वाले तीन विशालकाय 18 टायर वाले ट्रक-ट्रॉला, फर्जी नंबर प्लेट, ग्राइंडर कार और टेस्टिंग मशीन भी जब्त की है। जांच में जो सबसे चौंकाने वाला खुलासा हुआ, वह है चोरी करने का तरीका। यह गिरोह धर्मकांटों (वजन केंद्रों) पर इलेक्ट्रॉनिक चिप लगाकर रिमोट के माध्यम से वजन में हेराफेरी करता था। इस चिप की मदद से आरोपी ट्रक का वजन कागजों पर कम दिखा देते थे, जिससे साइट से सरिया गायब होने के बावजूद वजन बराबर प्रतीत होता था और चोरी पकड़ में नहीं आती थी।
ये भी पढ़ें गाजियाबादः डासना जेल में यूपी बोर्ड परीक्षा की पूरी तैयारी, 63 कैदी देंगे 10वीं-12वीं की परीक्षाडीसीपी वेव सिटी ने बताया कि यह गिरोह आदित्य वर्ल्ड सिटी जैसी बड़ी निर्माण परियोजनाओं को अपना निशाना बना रहा था। गिरफ्तार मुख्य आरोपी आफताब उर्फ अफजल और उसके साथियों का पुराना आपराधिक इतिहास है। इनका जाल गाजियाबाद के अलावा आसपास के कई जनपदों में फैला हुआ था। आरोपियों के पास से भारी मात्रा में फर्जी बिल और इलेक्ट्रॉनिक रिमोट भी मिले हैं, जिनका इस्तेमाल वे वजन केंद्रों के सिस्टम को हैक करने में करते थे।
ये भी पढ़ें गाजियाबाद: औद्योगिक साहिबाबाद की दो फैक्ट्रियों में लगी आग, 10 दमकल गाड़ियों की मदद से पाया गया काबूफिलहाल पुलिस ने चारों आरोपियों को जेल भेज दिया है। पुलिस उन कबाड़ियों और व्यापारियों की भी तलाश कर रही है, जो इस चोरी के सरिए को सस्ते दामों पर खरीदा करते थे। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि इस गिरोह के पकड़े जाने से क्षेत्र में संगठित चोरी की वारदातों पर लगाम लगेगी। पुलिस अब इस मामले में धर्मकांटा संचालकों की भूमिका की भी जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस धोखाधड़ी में उनकी मिलीभगत थी या नहीं।
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