दिल्ली दंगे: शरजील इमाम को 10 दिन की अंतरिम जमानत, कोर्ट ने भाई की शादी के लिए दी राहत
दिल्ली। दिल्ली में साल 2020 में हुए दंगे से जुड़े कथित साजिश मामले में आरोपी शरजील इमाम को कड़कड़डूमा कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने शरजील इमाम को राहत देते हुए 10 दिन की अंतरिम जमानत मंजूर की है। अदालत ने यह जमानत उन्हें अपने भाई की शादी में शामिल होने और अपनी बीमार मां की देखभाल करने के लिए दी है। मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि शरजील इमाम के परिवार में उनके भाई की शादी तय है और घर में उनकी उपस्थिति आवश्यक है। साथ ही, उनकी मां की तबीयत भी खराब बताई गई।
परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने शरजील इमाम को 10 दिनों की अंतरिम जमानत देने का फैसला सुनाया। बता दें कि दिल्ली पुलिस ने शरजील इमाम को 28 जनवरी, 2020 को बिहार के जहानाबाद से जामिया मिलिया इस्लामिया और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में कथित तौर पर भड़काऊ भाषण देने के आरोप में गिरफ्तार किया था। वह तब से हिरासत में है और बाद में दंगों में उसकी कथित भूमिका के लिए यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया गया था। उस पर आरोप है कि उसने फरवरी 2020 में दिल्ली में बड़े पैमाने पर हिंसा की साजिश रची थी।
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इस मामले में यूएपीए (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) के तहत केस दर्ज किया गया है। शरजील इमाम के साथ कई अन्य लोगों पर भी इसी मामले में साजिशकर्ता होने का आरोप है। इससे पहले, दिल्ली हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने शरजील की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। आपको बताते चलें, दिल्ली में हुए दंगे में कई लोगों की मौत हो गई थी और करीब 700 से अधिक लोग घायल हुए थे। हिंसा की शुरुआत नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) और एनआरसी के विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई थी, जहां कई स्थानों पर हालात बेकाबू हो गए थे।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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