100 करोड़ का महाघोटाला, नोएडा में पकड़ा फर्जी होम लोन रैकेट, HDFC और Axis बैंक के पूर्व एक्जीक्यूटिव समेत 9 गिरफ्तार
गौतमबुद्ध नगर: उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (UP STF) ने एक बड़े संगठित वित्तीय अपराध गिरोह का भंडाफोड़ किया है। यह गिरोह फर्जी दस्तावेजों, कूटरचित प्रोफाइल और बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत से विभिन्न बैंकों से ₹100 करोड़ से अधिक का होम लोन और पर्सनल लोन हड़प रहा था।
एसटीएफ ने त्वरित कार्रवाई करते हुए रैकेट के सरगना रामकुमार सहित कुल 8 आरोपियों को सूरजपुर थाना क्षेत्र, गौतमबुद्ध नगर से गिरफ्तार किया है।
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एसटीएफ ने जिन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनमें शामिल हैं:
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रामकुमार (सरगना)
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नितिन जैन
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मौ. वसी
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शमशाद आलम
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इन्द्रकुमार कर्माकर
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अनुज यादव
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ताहिर हुसैन
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अशोक उर्फ दीपक
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नीति जैन उर्फ रिकी (कुल 9 गिरफ्तारियाँ, सरगना सहित)
फर्जीवाड़ा कैसे हुआ?
इस गिरोह का खुलासा तब हुआ जब एचडीएफसी बैंक के एक अधिकारी ने कुछ संदिग्ध लोन फाइलों के संबंध में एसटीएफ को शिकायत भेजी। एसटीएफ की जाँच में सामने आया कि गिरोह अत्यंत संगठित तरीके से काम कर रहा था:
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फर्जी दस्तावेज: गिरोह फर्जी आधार कार्ड, नकली बैंक खाते, झूठी वेतन स्लिप (Salary Slips) और जाली नियुक्ति पत्र तैयार करता था।
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फर्जी प्रोफाइल: इन दस्तावेजों के आधार पर लोगों की बनावटी प्रोफाइल तैयार की जाती थी।
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बैंक मिलीभगत: इन्हीं फर्जी प्रोफाइल के नाम पर बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत से करोड़ों रुपये के होम और पर्सनल लोन आसानी से स्वीकृत करा लिए जाते थे।
सरगना का कबूलनामा और मनी लॉन्ड्रिंग
पूछताछ में गिरोह के सरगना रामकुमार ने स्वीकार किया कि वह पूर्व में एचडीएफसी और एक्सिस बैंक में लोन एक्जीक्यूटिव के रूप में काम कर चुका है, जिससे उसे सिस्टम की पूरी जानकारी थी।
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फर्जी कंपनियां: उसने "टीएसए सॉफ्टवेर सर्विसेज लिमिटेड" और "ट्रिपटैकी प्राइवेट लिमिटेड" जैसी कंपनियां रजिस्टर कर रखी थीं, जिनमें फर्जी व्यक्तियों को निदेशक दिखाकर बैंक खाते खुलवाए जाते थे और हर महीने सैलरी भेजी जाती थी ताकि उनकी प्रोफाइल 'जेनुइन' लगे।
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विदेशियों की पहचान का दुरुपयोग: गिरोह के कुछ सदस्य बिहार और अन्य राज्यों से बिचौलियों के जरिए खाड़ी देशों (Gulf Countries) में काम करने वाले लोगों की पहचान का दुरुपयोग करते थे। उनकी पहचान पर सम्पत्तियां खरीदवाकर करोड़ों रुपये के लोन उठाए जाते थे।
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4.8 करोड़ का लोन: दिल्ली की एक संपत्ति के नाम पर ही 4.8 करोड़ रुपये का लोन लिया गया था।
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मनी लॉन्ड्रिंग: एसटीएफ ने पाया कि गिरोह अब तक 20 से अधिक फर्जी फर्मों के माध्यम से इस धन को अलग-अलग खातों में घुमा कर मनी लॉन्ड्रिंग कर रहा था।
नेटवर्क की व्यापकता
एसटीएफ ने बताया कि इस गिरोह की आपराधिक गतिविधियां उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़, उत्तराखंड और नोएडा तक फैली हुई थीं। एसटीएफ अब नेटवर्क की वित्तीय लेयरिंग, इसमें शामिल बिल्डरों की भूमिका और बैंक अधिकारियों की संभावित मिलीभगत की गहराई से जाँच कर रही है।
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