राजस्थान में 40% कमीशन कांड: तीन विधायकों की बढ़ी मुश्किलें, विधानसभा की कमेटी ने 19 दिसंबर को किया तलब
जयपुर: राजस्थान की राजनीति में 'विधायक निधि' (MLA LAD) के उपयोग में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों ने हड़कंप मचा दिया है। विधानसभा की याचिका एवं सदाचार कमेटी ने विधायक कोष से जारी होने वाली राशि में 40 प्रतिशत तक कमीशन की डील करने के आरोपों में तीन विधायकों को नोटिस जारी कर तलब किया है।
इन विधायकों को मिला नोटिस
कमेटी ने जिन तीन विधायकों को आरोपी मानते हुए नोटिस भेजा है, उनमें शामिल हैं:
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रेवंत राम डांगा
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अनीता जाटव
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ऋतु बनावत
इन तीनों विधायकों को 19 दिसंबर को सुबह 11 बजे विधानसभा में कमेटी के समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश होकर अपना पक्ष रखना होगा।
भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस: स्पीकर का कड़ा रुख
यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने एक अख़बार में छपे स्टिंग ऑपरेशन में विधायकों के आचरण और भ्रष्टाचार की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए मामला याचिका एवं सदाचार कमेटी को रेफर किया। कमेटी के सभापति कैलाश वर्मा ने बुधवार को हुई बैठक के बाद स्पष्ट संदेश दिया कि सदन की गरिमा और अनुशासन के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
कैलाश वर्मा ने कहा, "भ्रष्टाचार का मामला अपने आप में बहुत गंभीर है। हमने विधायकों को व्हाट्सएप और ईमेल के जरिए भी नोटिस भेज दिए हैं। हम तीनों से अलग-अलग 'वन-टू-वन' बात करेंगे और पूरे प्रकरण की तह तक जाएंगे।"
क्या हो सकती है कार्रवाई?
सूत्रों के अनुसार, यदि कमेटी जांच में विधायकों को दोषी पाती है, तो वह विधानसभा अध्यक्ष को कड़ी कार्रवाई की सिफारिश करेगी। नियमों के मुताबिक:
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विधायकों को सदन से निलंबित (Suspend) किया जा सकता है।
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अत्यंत गंभीर स्थिति में उनकी सदस्यता (Membership) रद्द करने की सिफारिश भी हो सकती है।
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विधानसभा अध्यक्ष का निर्णय इस मामले में अंतिम होगा, जिसे आमतौर पर किसी भी कोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकती।
विस्तृत जांच की तैयारी
कमेटी अपनी रिपोर्ट तैयार कर स्पीकर को सौंपेगी। इसके बाद आगामी कार्रवाई स्पीकर के विवेक पर निर्भर करेगी। राजस्थान विधानसभा के इतिहास में यह संभवतः पहला मौका है जब भ्रष्टाचार के आरोपों में एक साथ तीन विधायकों पर इतनी त्वरित और सख्त कार्रवाई की दिशा में कदम उठाए गए हैं।
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