आधी रात 1 बजे कोर्ट में पेश हुए तीन आरोपी, मिला ट्रांजिट रिमांड; सुबह 6 बजे दिल्ली पुलिस उन्हें लेकर रवाना
शिमला। यूथ कांग्रेस के तीन कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेने का मामला अब कानूनी खींचतान का रूप ले चुका है। दिल्ली पुलिस ने तीनों नामजद आरोपियों को बुधवार आधी रात करीब 1 बजे एसीजेएम शिमला की अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें ट्रांजिट रिमांड मिल गया। रिमांड मिलने के बाद जरूरी औपचारिकताएं पूरी करते हुए दिल्ली पुलिस गुरुवार सुबह करीब 6 बजे तीनों आरोपियों को अपने साथ लेकर दिल्ली के लिए रवाना हो गई।
दिल्ली पुलिस के अधिकृत वकील नंद लाल ठाकुर ने कहा कि अदालत से विधिसम्मत तरीके से ट्रांजिट रिमांड प्राप्त किया गया है और पूरी कार्रवाई कानून के दायरे में की गई है। पुलिस सूत्रों के अनुसार अदालत से अनुमति मिलने के बावजूद जिला पुलिस ने दिल्ली पुलिस के वाहनों को सुबह लगभग 5 बजकर 55 मिनट तक डिटेन रखा। इसके बाद औपचारिकताएं पूरी होने पर काफिले को आगे बढ़ने दिया गया।
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यह पूरा विवाद बुधवार तड़के शुरू हुआ था, जब दिल्ली पुलिस की टीम रोहड़ू उपमंडल के चिड़गांव इलाके में पहुंची और एक निजी रिसोर्ट में ठहरे यूथ कांग्रेस के तीन कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। बताया गया कि ये तीनों एआई समिट में हुए कथित हंगामे और शर्टलेस प्रदर्शन के मामले में वांछित थे।
उधर, स्थानीय स्तर पर मामला तब गरमा गया जब हिमाचल पुलिस को शिकायत मिली कि 15–20 लोग सादे कपड़ों में आए और मांडली स्थित चांशल कैंप रिजॉर्ट से तीन मेहमानों को जबरन अपने साथ ले गए। शिकायतकर्ता संदीप रंजन पुत्र नेगी राम की शिकायत पर थाना चिड़गांव में केस दर्ज किया गया, जिसमें भारतीय न्याय संहिता की धाराएं 140(3), 329(4), 127(2) और 190 लगाई गईं। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि टीम सीसीटीवी का डीवीआर और एक थार गाड़ी भी साथ ले गई।
बाद में स्पष्ट हुआ कि कार्रवाई दिल्ली पुलिस की थी। हिमाचल पुलिस का कहना है कि अंतरराज्यीय कार्रवाई के नियमों के तहत स्थानीय पुलिस को पहले सूचना देना जरूरी होता है, जो इस मामले में नहीं दी गई। इसी आधार पर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को लेकर अपहरण का केस दर्ज किया गया।
बुधवार दिन के समय जिला पुलिस ने कंडाघाट और शोघी बैरियर पर दिल्ली पुलिस के वाहनों को रोका और तीनों युवकों को टीम सहित जिला न्यायालय चक्कर, शिमला लाया गया। बालूगंज पुलिस की ओर से दिल्ली पुलिस के खिलाफ एसीजेएम कोर्ट में निजी शिकायत भी दायर की गई, जिसे अदालत ने अगली तारीख के लिए सूचीबद्ध कर दिया। जानकारी अनुसार शाम को ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद दिल्ली पुलिस आरोपियों को लेकर रवाना हुई थी, लेकिन शोघी बैरियर पर शिमला पुलिस ने काफिले को फिर रोक लिया था। देर रात चली कानूनी प्रक्रिया के बाद अंततः गुरुवार सुबह दिल्ली पुलिस तीनों आरोपियों को लेकर शिमला से निकल गई।
इस घटनाक्रम ने अंतरराज्यीय पुलिस कार्रवाई के नियमों और आपसी समन्वय पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस सूत्रों का कहना है कि आगे की कानूनी स्थिति अदालत की अगली सुनवाई में और स्पष्ट हो सकती है।
इस बीच नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने हिमाचल सरकार और पुलिस की कार्रवाई की आलोचना की है। उनका कहना है कि अंतरराज्यीय ऑपरेशन में दिल्ली पुलिस को सहयोग मिलना चाहिए था, लेकिन इसके उलट टकराव की स्थिति पैदा हो गई। उन्होंने राज्य सरकार पर राजनीतिक दबाव में काम करने का आरोप भी लगाया है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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