राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान सदस्यों ने मथुरा में मेट्रो, जातीय भेदभाव, एआई डीपफेक सहित विभिन्न मुद्दे उठाए
नई दिल्ली। राज्यसभा में गुरुवार को शून्यकाल के दौरान सदस्यों ने मथुरा-वृंदावन मेट्रो रेल चलाने, कार्यस्थलों पर जातीय भेदभाव, एआई आधारित डीपफेक के बढ़ते खतरे, शिक्षक भर्ती में आयु सीमा छूट, विश्वविद्यालय को केंद्रीय दर्जा देने, किसानों को केसीसी ऋण, अवैध खनन तथा श्रमिक आंदोलनों जैसे जनता से जुड़े विभिन्न महत्व मुद्दे उठाए।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में मेट्रो नेटवर्क का व्यापक विस्तार हुआ है और आज 26 शहरों में मेट्रो सेवाएं संचालित हो रही हैं, जबकि पहले यह संख्या केवल 05 थी। सिंह ने कहा कि मथुरा में मेट्रो परियोजना से श्रद्धालुओं और पर्यटकों को सुरक्षित, सरल और सुगम परिवहन सुविधा मिलेगी, निजी वाहनों पर निर्भरता घटेगी और ट्रैफिक जाम तथा वायु प्रदूषण में कमी आएगी। इस परियोजना से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे और यह धार्मिक आस्था तथा आधुनिक शहरी सुविधाओं के संतुलन का आदर्श उदाहरण बनेगी।
नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने ओडिशा के एक आंगनवाड़ी केंद्र में दलित महिला रसोइया द्वारा तैयार भोजन को एक समुदाय विशेष द्वारा स्वीकार न किए जाने और पिछले तीन महीने से केंद्र के बहिष्कार का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में सामाजिक सुधार और विकास के दावों के बीच इस प्रकार की घटनाएं चिंताजनक हैं। आंगनवाड़ी केंद्र बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास की आधारशिला हैं लेकिन जातिगत भेदभाव से बच्चों के पोषण और शिक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
उन्होंने कहा कि यह संविधान के अनुच्छेद 21 (ए) के तहत शिक्षा के अधिकार तथा अनुच्छेद 47 के तहत पोषण स्तर और जनस्वास्थ्य सुधारने के राज्य के दायित्व का उल्लंघन है। खरगे ने मध्य प्रदेश, गुजरात और चंडीगढ़ की हालिया घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि जातिगत भेदभाव केवल सामाजिक जीवन तक सीमित नहीं है बल्कि कार्यस्थलों पर भी मौजूद है। उन्होंने ऐसे मामलों में समयबद्ध और सख्त कार्रवाई तथा जवाबदेही तय करने की मांग की।
कांग्रेस के विवेक के. तन्खा ने चार्टर्ड अकाउंटेंटों (सीए) के हितों की रक्षा के लिए विशेष कानून बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि सीए वित्तीय योजनाओं के क्रियान्वयन में सरकार के महत्वपूर्ण सहयोगी हैं लेकिन हाल में विभिन्न एजेंसियों द्वारा उनके कार्य में हस्तक्षेप और निजता के उल्लंघन की घटनाएं सामने आई हैं। उन्होंने ‘सीए प्रोटेक्शन एक्ट’ लाने की अपील करते हुए कहा कि भारतीय सीए फर्मों को प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए और ऑडिट क्षेत्र में ‘बिग फोर’ कंपनियों के वर्चस्व को संतुलित करने की आवश्यकता है।
कांग्रेस की रंजीत रंजन ने दिल्ली सरकार के स्कूलों में शिक्षक भर्ती के लिए महिलाओं को दी जाने वाली आयु सीमा छूट को बहाल करने की मांग की। उन्होंने कहा कि दिसंबर 2025 में दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (डीएसएसएसबी) द्वारा आयोजित परीक्षा, पात्रता शर्तों में अचानक बदलाव के कारण रद्द करनी पड़ी थी। टीजीटी पद के लिए अधिकतम आयु सीमा घटाकर 30 वर्ष कर दी गई और महिलाओं की आयु छूट समाप्त कर दी गई, जो अन्यायपूर्ण है। उन्होंने केंद्रीय विद्यालय, सैनिक स्कूल और हरियाणा सहित अन्य राज्यों में अधिक आयु सीमा का उल्लेख करते हुए देशभर में एक समान नीति बनाने की मांग की।
बीजू जनता दल (बीजेडी) के देवाशीष सामंतराय ने ओडिशा के रेवनशॉ विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि राज्य में केवल एक केंद्रीय विश्वविद्यालय है और बड़ी आदिवासी आबादी को उच्च शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए यह कदम आवश्यक है।
भाजपा के डॉ. भीम सिंह ने बिहार में किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) ऋण वितरण में आ रही कठिनाइयों का मुद्दा उठाया और बैंकों की जटिल प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग की।
कांग्रेस के राजीव शुक्ला ने एआई आधारित डीपफेक और फर्जी वीडियो के अनियंत्रित प्रसार को लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा बताते हुए राष्ट्रीय स्तर पर एआई निर्मित सामग्री की निगरानी एजेंसी गठित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि मोबाइल ऐप के माध्यम से किसी भी व्यक्ति का चेहरा और आवाज नकली वीडियो में प्रयुक्त की जा सकती है, जिससे महिलाओं और जनप्रतिनिधियों को विशेष रूप से निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने प्लेटफॉर्म पर वॉटरमार्क अनिवार्य करने, एआई अपराधों पर सख्त कानून और युवाओं के लिए जागरूकता अभियान चलाने का सुझाव दिया।
भाजपा की दर्शना सिंह ने उत्तर प्रदेश में चीता संरक्षण की संभावनाओं पर विचार करने की मांग की, जबकि भाजपा की माया नारोलिया ने मध्य प्रदेश में अवैध खनन का मुद्दा उठाया।
सीपीआई (एम) के डॉ. जॉन ब्रिटास ने किसान और श्रमिक संगठनों द्वारा की जा रही हड़ताल का उल्लेख करते हुए नई श्रम संहिता, मनरेगा की बहाली और अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को लेकर उठ रहे विरोध की चर्चा की। उन्होंने श्रम संहिताओं को श्रमिक-विरोधी बताते हुए उन्हें रद्द करने की मांग की और कहा कि यह संघर्ष लोकतंत्र और संप्रभुता की रक्षा से जुड़ा है।
भाजपा की डॉ. मेधा विश्राम कुलकर्णी ने महाराष्ट्र के शहरी क्षेत्रों, विशेषकर पुणे में वर्षा जल संचयन की उपेक्षा पर चिंता व्यक्त करते हुए प्रभावी क्रियान्वयन की मांग की।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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