2029 से बदलेगी संसद की तस्वीर, लोकसभा में होंगी 816 सीटें और 273 महिला सांसद, यूपी से होंगे 120 एमपी
'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को धार देने की तैयारी; 50% बढ़ेगी सीटों की संख्या, यूपी विधानसभा में भी बढ़कर 605 हो सकते हैं विधायक, संसद में आएंगे दो विशेष बिल

नई दिल्ली। भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था में एक ऐसे युगान्तरकारी बदलाव की पटकथा लिखी जा चुकी है, जो देश की राजनीति का चेहरा हमेशा के लिए बदल देगा। केंद्र सरकार 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को जमीन पर उतारने के लिए लोकसभा की संरचना में आमूल-चूल परिवर्तन करने जा रही है। ताज़ा रिपोर्टों के अनुसार, 2029 के आम चुनाव से पहले महिलाओं को 33% आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए लोकसभा सीटों की संख्या में 50% की भारी बढ़ोतरी का प्रस्ताव तैयार है। इसके लिए संसद के मौजूदा सत्र में ही दो ऐतिहासिक बिल लाए जा सकते हैं।
543 से बढ़कर 816 होंगी सीटें: पुरुष सांसदों की कुर्सी भी रहेगी सुरक्षित सरकार का मास्टरस्ट्रोक यह है कि लोकसभा की कुल सीटों को मौजूदा 543 से बढ़ाकर 816 करने पर विचार हो रहा है। यह वृद्धि 'परिसीमन' (Delimitation) के माध्यम से की जाएगी। इस फॉर्मूले का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि सीटों की संख्या बढ़ने से मौजूदा पुरुष सांसदों के कार्यक्षेत्र पर सीधा असर नहीं पड़ेगा और महिलाओं के लिए भी पर्याप्त जगह बन जाएगी। 2029 की नई लोकसभा में 273 महिला सांसद होंगी, जबकि वर्तमान में यह संख्या मात्र 78 है।
उत्तर प्रदेश बनेगा सियासत का 'महाकेंद्र': 80 से बढ़कर 120 होंगी सीटें इस नए फॉर्मूले से राज्यों की सियासी ताकत में भी बड़ा उछाल आएगा। संभावित आंकड़ों के अनुसार:
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उत्तर प्रदेश: लोकसभा सीटें 80 से बढ़कर 120 हो जाएंगी।
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बिहार: 40 से बढ़कर 60 सीटें होंगी।
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तमिलनाडु: 39 से बढ़कर लगभग 59 सीटें होंगी। यही नहीं, उत्तर प्रदेश विधानसभा की सीटें भी 403 से बढ़कर 605 हो सकती हैं, जिससे स्थानीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी का नया अध्याय शुरू होगा।
एससी-एसटी कोटा और संविधान संशोधन की तैयारी प्रस्ताव के मुताबिक, आरक्षित सीटों में भी एक-तिहाई हिस्सा उसी वर्ग (SC/ST) की महिलाओं के लिए आरक्षित रहेगा। सरकार इसे 2011 की जनगणना के आधार पर ही लागू करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 82 और 368 में संशोधन ला सकती है। इसके लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी, जिसे देखते हुए गृह मंत्री अमित शाह विपक्ष के साथ आम सहमति बनाने की कवायद शुरू कर चुके हैं।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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