भारत-श्रीलंका नौसेनाओं के बीच बढ़ेगा प्रशिक्षण तालमेल, त्रिंकोमाली में आईएनएस तरंगिनी का भव्य स्वागत
श्रीलंकाई कैडेट्स तरंगिनी पर सीखेंगे नौकायन के गुर, समुद्री संबंधों को मिलेगी नई मजबूती
त्रिंकोमाली (श्रीलंका)। भारतीय नौसेना और श्रीलंका नौसेना के बीच दशकों पुराने समुद्री संबंधों को और प्रगाढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, भारतीय नौसेना का प्रसिद्ध प्रशिक्षण पोत आईएनएस तरंगिनी अपने प्रशिक्षण मिशन के अगले चरण के लिए श्रीलंका के ऐतिहासिक त्रिंकोमाली पत्तन पर पहुंचा। यहां आईएनएस तरंगिनी का भव्य स्वागत किया गया।
श्रीलंका नौसेना के पूर्वी नौसेना क्षेत्र के उच्चाधिकारियों और प्रतिनिधियों ने भारतीय पोत आईएनएस तरंगिनी के त्रिंकोमाली बंदरगाह में प्रवेश करते ही पारंपरिक नौसैनिक गर्मजोशी के साथ उसका स्वागत किया। यह यात्रा केवल एक औपचारिक बंदरगाह कॉल नहीं है, बल्कि दोनों देशों के बीच भविष्य के समुद्री नेतृत्व को तैयार करने की एक संयुक्त कवायद है। गौरतलब है कि विशाखापत्तनम में हाल ही में संपन्न हुई 'अंतर्राष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा 2026' में अपनी सफल सहभागिता के बाद तरंगिनी अब अपने प्रशिक्षण मिशन के अगले चरण पर है।
उच्च स्तरीय चर्चा और पेशेवर आदान-प्रदान
पोत के आगमन के पश्चात, तरंगिनी के कमांडिंग ऑफिसर ने पूर्वी नौसेना क्षेत्र के डिप्टी कमांडर कमोडोर हरिथा जयदेवथे से शिष्टाचार भेंट की। इस बैठक के दौरान मुख्य रूप से 'सेल ट्रेनिंग' (पाल आधारित प्रशिक्षण) में सहयोग बढ़ाने और दोनों नौसेनाओं के बीच साझा परिचालन समझ विकसित करने पर चर्चा हुई।
सांस्कृतिक और सामुदायिक जुड़ाव
भारतीय पोत ने स्थानीय समुदाय के साथ जुड़ने के लिए अपने द्वार खोले। श्रीलंकाई रक्षा कर्मियों, उनके परिवारों और प्रशिक्षु अधिकारियों को पोत के परिचयात्मक दौरे के लिए आमंत्रित किया गया। बंदरगाह पर रुकने के दौरान कई सामुदायिक सहभागिता गतिविधियों और पेशेवर प्रशिक्षण विनिमय सत्रों की योजना बनाई गई है, जिससे दोनों देशों के कर्मियों के बीच व्यक्तिगत और व्यावसायिक संबंध मजबूत होंगे।
समुद्र में संयुक्त प्रशिक्षण
इस दौरे का सबसे महत्वपूर्ण आकर्षण श्रीलंका नौसेना एवं समुद्री अकादमी के चयनित प्रशिक्षु अधिकारियों की भागीदारी है। ये प्रशिक्षु आईएनएस तरंगिनी पर सवार होकर कोलंबो तक की यात्रा करेंगे। इस समुद्री यात्रा के दौरान भारतीय विशेषज्ञ श्रीलंकाई कैडेट्स को पाल संभालने, नेविगेशन और पारंपरिक नौकायन के विभिन्न कठिन पहलुओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण देंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि 'पड़ोसी प्रथम' की नीति के तहत आईएनएस तरंगिनी का यह दौरा हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा और विकास (SAGAR) के साझा दृष्टिकोण को साकार करने में एक मील का पत्थर साबित होगा।
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लेखक के बारे में
ओ.पी. पाल पिछले साढ़े तीन दशकों से पत्रकारिता में सक्रिय एक प्रतिष्ठित नाम हैं। भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त (P.I.B. Accredited) वरिष्ठ पत्रकार श्री पाल ने लंबे समय तक लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही के साथ-साथ गृह, रक्षा और कृषि जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की नेशनल ब्यूरो स्तर पर रिपोर्टिंग की है।
अमर उजाला और दैनिक जागरण से पत्रकारिता की शुरुआत करने वाले श्री पाल ने 'शाह टाइम्स' में न्यूज़ एडिटर और 'हरिभूमि' (दिल्ली) में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में लंबी सेवाएं दी हैं। राजनीति विज्ञान और कृषि के विशेषज्ञ होने के साथ-साथ वे 'साहित्य रत्न' से भी विभूषित हैं। वर्तमान में वे एक स्वतंत्र पत्रकार और स्तंभकार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

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