आयुर्वेदिक दिनचर्या: फिट बॉडी और रिलैक्स माइंड का सीक्रेट मंत्र
नई दिल्ली। आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अक्सर अपनी दिनचर्या को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे शरीर बीमारियों का घर बन जाता है। ऐसे में आयुर्वेद हमें सिखाता है कि अगर हम प्रकृति के नियमों के अनुसार अपना दिन बिताएं तो शरीर भी तंदुरुस्त रहेगा और मन भी शांत रहेगा।
सबसे पहली और अहम आदत है सुबह जल्दी उठना, खासकर सूर्योदय से पहले। इस समय वातावरण शांत और ताजा होता है, दिमाग साफ रहता है और दिन की शुरुआत सकारात्मक सोच के साथ होती है। उठते ही लगभग आधा से एक लीटर गुनगुना पानी पीना बहुत फायदेमंद माना गया है। इससे पेट साफ रहता है और शरीर से विषैले तत्व बाहर निकलते हैं। इसके बाद शौच और दांतों की सफाई जरूरी है। नीम या बबूल की दातुन का इस्तेमाल या सामान्य ब्रश से दांत साफ करना, जीभ की सफाई करना और कुल्ला करना मुंह की सेहत के लिए बहुत जरूरी है।
आयुर्वेद में तेल से गरारे करने की भी सलाह दी जाती है, जिससे दांत और मसूड़े मजबूत होते हैं। इसके बाद नाक में दो-दो बूंद तेल या घी डालना और आंखों को ठंडे पानी से धोना भी लाभकारी बताया गया है। शरीर की मालिश (अभ्यंग) रोजाना या हफ्ते में कुछ दिन जरूर करनी चाहिए। सरसों, तिल या नारियल के तेल से हल्की मालिश करने से शरीर में रक्त संचार बेहतर होता है, त्वचा चमकदार बनती है और थकान दूर होती है। खासकर सिर और पैरों की मालिश से अच्छी नींद आती है और तनाव कम होता है। इसके बाद हल्का व्यायाम, योग या प्राणायाम करना चाहिए। इतना ही व्यायाम करें कि हल्का पसीना आ जाए, ज्यादा थकान नहीं होनी चाहिए। नहाने के लिए सिर पर सामान्य तापमान का पानी और शरीर पर हल्का गर्म पानी इस्तेमाल करना अच्छा माना जाता है। स्नान से शरीर तरोताजा होता है और आलस्य दूर होता है। खाने के मामले में भी आयुर्वेद संतुलन पर जोर देता है।
ताजा, हल्का और सुपाच्य भोजन लें। ज्यादा तला-भुना और भारी खाना कम करें। समय पर खाना और अच्छी तरह चबा कर खाना पाचन के लिए बहुत जरूरी है। रात को जल्दी और हल्का भोजन करें और खाने के तुरंत बाद सोने से बचें। अच्छी नींद भी उतनी ही जरूरी है जितना अच्छा भोजन। बड़ों के लिए छह से आठ घंटे और बच्चों के लिए आठ से दस घंटे की नींद पर्याप्त मानी जाती है। सोने से पहले हाथ-पैर धो लेना, पैरों में थोड़ा गुनगुना तेल लगाकर मालिश करना और मन को शांत करने के लिए हल्का संगीत या ध्यान करना बहुत फायदेमंद होता है।
रॉयल बुलेटिन से जुड़ें:
देश-प्रदेश की ताज़ा ख़बरों को सबसे पहले पढ़ने के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल को फॉलो करें:
आपको यह खबर कैसी लगी? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में ज़रूर दे। आपकी राय रॉयल बुलेटिन को और बेहतर बनाने में बहुत उपयोगी होगी।
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
रविता ढांगे 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज़ एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और डिजिटल न्यूज़ डेस्क के प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने अपने पेशेवर करियर की शुरुआत 'समाचार टुडे' से की थी, जहाँ उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों और न्यूज़ ऑपरेशन्स के बुनियादी सिद्धांतों को सीखा।
रविता ढांगे की सबसे बड़ी विशेषता उनकी मजबूत तकनीकी पृष्ठभूमि है; उन्होंने BCA, PGDCA और MCA (Master of Computer Applications) जैसी उच्च डिग्रियां प्राप्त की हैं। उनकी यह तकनीकी विशेषज्ञता ही 'रॉयल बुलेटिन' को डिजिटल रूप से सशक्त बनाती है। वर्ष 2022 से संस्थान का अभिन्न हिस्सा रहते हुए, वे न केवल खबरों के संपादन में निपुण हैं, बल्कि न्यूज़ एल्गोरिदम और डेटा मैनेजमेंट के जरिए खबरों को सही दर्शकों तक पहुँचाने में भी माहिर हैं। वे पत्रकारिता और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) के बेहतरीन संगम का प्रतिनिधित्व करती हैं, जिससे पोर्टल की डिजिटल रीच और विश्वसनीयता में निरंतर वृद्धि हो रही है।

टिप्पणियां